महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर? सीक्रेट मीटिंग के बाद महिला आरक्षण बिल पर शरद पवार गुट ले सकता है यू-टर्न!

रात 11 बजे CM आवास पर हुई इस गुप्त बैठक ने उड़ाए महाविकास अघाड़ी के होश; क्या मानसून सत्र से पहले शरद पवार बदलने जा रहे हैं अपनी बड़ी रणनीति?…
जुबिली स्पेशल डेस्क
महाराष्ट्र की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ पर मंगलवार रात करीब 11 बजे एक ऐसी गुप्त बैठक हुई, जिसने राज्य से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
बंद कमरे में करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में एनसीपी (शरद पवार) के कद्दावर नेता जयंत पाटिल, और एनसीपी (अजित पवार) के प्रफुल्ल पटेल व सुनील तटकरे एक साथ नजर आए।
भले ही इस बैठक को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है, वह विपक्षी गठबंधन (MVA) के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
क्या महिला आरक्षण बिल पर यू-टर्न लेंगे शरद पवार?
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी, केंद्र सरकार द्वारा आगामी मानसून सत्र में दोबारा लाए जाने वाले महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन कर सकती है।
गौर करने वाली बात यह है कि…
- पिछले बजट सत्र में शरद पवार की पार्टी ने इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया था।
- आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पिछली बार यह बिल लोकसभा में गिर गया था।
- अब 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक चलने वाले संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार इसे दोबारा पेश करने की तैयारी में है।
सियासी गलियारों में चर्चा: भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद इस मुद्दे पर शरद पवार गुट से संपर्क साधा था। इसी बैक-चैनल बातचीत के बाद अब एनसीपी (SP) के रुख में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी? पार्टी में बड़ी टूट रोकने का ‘पवार गेम’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार का यह संभावित फैसला सिर्फ एक बिल के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सियासी रणनीति है।
- सांसदों को रोकने की कवायद: पिछले कुछ दिनों से खबरें गर्म हैं कि शरद पवार गुट के कुछ सांसद भाजपा या शिवसेना (शिंदे गुट) के संपर्क में हैं।
- रणनीतिक कदम: इस बिल पर सरकार का साथ देकर शरद पवार अपनी पार्टी के भीतर होने वाली संभावित टूट को टालना चाहते हैं।
संसद में ही साफ होगी असली तस्वीर
हालांकि, एनसीपी (शरद पवार) की ओर से अभी तक इस यू-टर्न को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के नेता इस मुद्दे पर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में अब देश भर की नजरें 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां बिल पेश होने के दौरान ही शरद पवार की असली रणनीति का खुलासा होगा।



