प्रयागराज में स्कूल के पास इलेक्ट्रिक शवदाह गृह पर हाईकोर्ट की रोक, प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज में एक निजी स्कूल के पास प्रस्तावित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्षकार बनाने का आदेश दिया है और प्रशासन को मौके का निरीक्षण कर सीलबंद रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

यह मामला नैनी के अरैल क्षेत्र का है, जहां नगर निगम इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का निर्माण करा रहा था। इसके खिलाफ एक निजी स्कूल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट आने तक प्रस्तावित स्थल पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह से जुड़ा कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा।

याचिकाकर्ता स्कूल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तरुण अग्रवाल और अधिवक्ता प्रभाष पांडे ने कोर्ट में दलील दी कि जिस भूमि पर निर्माण किया जा रहा है, वह मास्टर प्लान 2031 के तहत P5 श्रेणी में आती है।

स्कूल का कहना है कि यह क्षेत्र रिवर बैंक डेवलपमेंट के लिए आरक्षित है और यहां नदी तट विकास योजना के अलावा किसी अन्य प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है। ऐसे में नगर निगम का निर्माण कार्य नियमानुसार नहीं है।

स्कूल की ओर से यह भी कहा गया कि प्रस्तावित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार से करीब 200 मीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है।

याचिका में तर्क दिया गया कि इससे छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ स्कूल के शैक्षणिक वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

नगर निगम की ओर से अधिवक्ता विभू राय ने स्कूल की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि संबंधित भूमि निजी है और उसे विशेष रूप से इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण के लिए दान किया गया है।

नगर निगम का कहना है कि वर्तमान में भी स्थानीय लोग इसी स्थान पर पारंपरिक तरीके से खुले में अंतिम संस्कार करते हैं, जिससे पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों पर अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इलेक्ट्रिक शवदाह गृह बनने से प्रदूषण कम होगा और व्यवस्था अधिक वैज्ञानिक होगी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी पक्षकार बनाया है। साथ ही प्रशासन को स्थल का निरीक्षण कर विस्तृत सीलबंद रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

अब इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत तय करेगी कि प्रस्तावित निर्माण नियमों के अनुरूप है या नहीं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी। तब तक इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण से जुड़ी सभी गतिविधियां स्थगित रहेंगी।

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