US-Iran War: ‘ईरान अब कोई रेड लाइन नहीं देखेगा!’ खाड़ी देशों के तेल-गैस कुओं को उड़ाने की धमकी, अमेरिकी बेस पर मिसाइल तांडव

तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान महायुद्ध अब और अधिक विनाशकारी और व्यापक रूप अख्तियार करता जा रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के बुनियादी ढांचों-पावर प्लांट और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट—पर किए गए हालिया हमलों के बाद बौखलाए ईरान ने अब सीधे उन खाड़ी (गल्फ) देशों को निशाने पर ले लिया है जो इस जंग में अमेरिका के साथ खड़े हैं। ईरान ने इन देशों के आर्थिक तंत्र यानी तेल और गैस के कुओं को नेस्तनाबूद करने की खुली धमकी दी है।

ईरानी संसद के सबसे शक्तिशाली ‘राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग’ के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने उन सभी खाड़ी देशों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है जिन्होंने इस युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य नीतियों का समर्थन किया है या उन्हें अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने दिया है।

“खाड़ी के वे देश जो ईरान-अमेरिका जंग में ट्रंप के साथ खड़े रहे हैं, उन्हें अब अपने तेल और गैस के कुओं का जरूरत से ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। जब बात ईरान की संप्रभुता और रक्षा की आएगी, तो हमारी सेना किसी भी ‘रेड लाइन’ (सीमा) की परवाह नहीं करेगी।”

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस धमकी के बाद कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों के ऊर्जा ठिकानों पर सुरक्षा अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दी गई है, क्योंकि इन पर हमला होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल का हाहाकार मच जाएगा।

इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद तीखी पोस्ट शेयर कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जमकर खिंचाई की। अराघची ने साफ किया कि ईरान ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है।

  • सभ्य राष्ट्र का अपमान मंजूर नहीं: “ईरान एक बेहद सभ्य और साहसी राष्ट्र है। ट्रंप द्वारा अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से हमारी महानता और हमारे दृढ़ संकल्प में रत्ती भर भी कमी नहीं आएगी।”
  • भाषा नहीं, ऐक्शन से जवाब: “ईरान के लोग अपनी शालीनता, संस्कृति और मजबूत नैतिक मूल्यों के लिए जाने जाते हैं। हम अमेरिका की अभद्र भाषा का जवाब अभद्रता से नहीं, बल्कि पूरी निडरता के साथ अपनी सैन्य कार्रवाई (एक्शन) से देते हैं।”

जमीन पर इस कड़े ऐक्शन का असर साफ दिखने लगा है। ईरान की संभ्रांत सेना इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक घोषणा की है कि उसकी वायुसेना और नौसेना ने मिलकर कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिका के चार सबसे प्रमुख सैन्य अड्डों को मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों से पाट दिया है।

  • कुवैत: अमेरिकी सेना के बड़े गढ़ ‘कैंप अरिफजान’ और ‘अली अल सलेम एयर बेस’ को सीधे निशाना बनाया गया।
  • बहरीन: अमेरिकी नौसेना के केंद्र ‘जुफैर’ और रणनीतिक ‘शेख ईसा एयर बेस’ पर भारी गोलाबारी की गई।

आगे क्या? IRGC ने अमेरिका को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यह उनकी कार्रवाई की महज एक शुरुआत है। अगर पेंटागन या राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से ईरान की धरती पर आगे कोई भी हमला होता है, तो खाड़ी क्षेत्र और उसके बाहर मौजूद अन्य अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ इससे भी ज्यादा घातक और अंतिम एक्शन लिया जाएगा।

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