अमेरिका-ईरान युद्ध: मशहद में दो पुल तबाह होने का दावा, खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बीच दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान के मशहद शहर में दो पुलों को निशाना बनाया है। यह शहर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई का गृह नगर बताया जा रहा है और उनके अंतिम संस्कार से पहले इस हमले की खबर ने विवाद को और बढ़ा दिया है।
ईरान की ओर से आरोप लगाया गया है कि यह कार्रवाई खामेनेई के अंतिम संस्कार को प्रभावित करने की कोशिश है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी प्रशासन की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ईरान ने ट्रंप पर लगाए आरोप
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई केवल सैन्य नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश है। वहीं, मशहद के एक होटल पर कथित तौर पर लगा एक बैनर भी चर्चा में है, जिस पर अंग्रेजी में लिखा है, “We will kill Trump.” यह बैनर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
जेडी वेंस की ईरान को चेतावनी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर हालिया समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ईरान ने एक बार फिर व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
वेंस ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने या बाधित करने की कोशिश की तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को प्रभावित करने वाली किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अमेरिका को भी उठाना पड़ा भारी नुकसान
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध के दौरान अमेरिका को भी सैन्य नुकसान झेलना पड़ा है। एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक अमेरिकी वायुसेना के 30 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए गए हैं।
बताया जा रहा है कि एक MQ-9 रीपर ड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 30 मिलियन डॉलर (लगभग 3 करोड़ अमेरिकी डॉलर) है। यदि यह दावा सही है तो अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लगातार बढ़ रहा है पश्चिम एशिया में तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।



