भीषण बमबारी के बाद ट्रंप का दावा-‘तेहरान ने समझौते के लिए किया फोन’, ईरान का करारा जवाब

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध के बीच एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना द्वारा चाबहार और बंदर अब्बास पर की गई भीषण बमबारी के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अब बैकफुट पर आ गया है और उसके अधिकारियों ने समझौते के लिए अमेरिका से संपर्क किया है।

डिजिटल मीडिया वेबसाइट Axios के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने विमान ‘एयर फोर्स वन’ में पत्रकारों से बात करते हुए यह सनसनीखेज खुलासा किया।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों की मार झेल रहे ईरानी अधिकारियों ने कुछ ही देर पहले वॉशिंगटन से संपर्क साधा है। ट्रंप ने कहा

“ईरानी अधिकारी बातचीत करना चाहते हैं और वे समझौता करने के इच्छुक हैं। लेकिन मुझे अब भी यकीन नहीं है कि किसी समझौते का पालन करने के मामले में ईरान पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं।”

ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का पुरजोर बचाव करते हुए अपनी ‘1 के बदले 20’ की नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि तेहरान की हरकतों का वॉशिंगटन ने बेहद सख्त जवाब दिया है और आगे भी ईरान के हर एक हमले के बदले अमेरिका 20 गुना ताकत से पलटवार करेगा।

दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के इन दावों और आक्रामक भाषा पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ट्रंप के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

ईरानी विदेश मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा:

  • कार्रवाई से जवाब: “हम अमेरिका की अशोभनीय और अपमानजनक भाषा का जवाब बयानों से नहीं, बल्कि अपनी सैन्य कार्रवाई से देते हैं।”
  • संप्रभुता सर्वोपरि: ट्रंप की गीदड़भभकी ईरानी जनता की महानता, सम्मान और उनके दृढ़ संकल्प को कम नहीं कर सकती। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

यह पूरा कूटनीतिक ड्रामा उस वक्त शुरू हुआ जब होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में जहाजों पर हुए हमलों से भड़के अमेरिका ने ईरान पर चौतरफा धावा बोल दिया। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के दो सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और सैन्य केंद्रों—चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) और बंदर अब्बास (Bandar Abbas)—पर जमकर बमबारी की।

इन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर समझौता पूरी तरह तार-तार हो चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या ईरान वाकई पर्दे के पीछे से टेबल टॉक की कोशिश कर रहा है या फिर मिडिल ईस्ट में तनाव की यह आग अमेरिका को भी अपनी चपेट में लेगी।

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