US-Iran Conflict: क्या टूटेगा इस्लामाबाद समझौता? अमेरिका पर भड़का ईरान, तेल प्रतिबंधों और धमाकों से बढ़ा महायुद्ध का खतरा

तेहरान/वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ युद्धविराम समझौता (Ceasefire Agreement) महज 20 दिनों के भीतर ही टूटने की कगार पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका पर ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) का खुला उल्लंघन करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।

इस कूटनीतिक तनाव के बीच, दक्षिणी ईरान के रणनीतिक इलाकों- सिरिक (Sirik), केशम द्वीप (Qeshm Island) और बंदर अब्बास (Bandar Abbas) में कई भीषण धमाकों की खबरें आई हैं। इन हमलों में कई लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की चिंगारी फिर सुलग उठी है।

  • समझौते पर संकट: 18 जून 2026 को हुए ‘इस्लामाबाद समझौते’ को अमेरिका ने तोड़ा- ईरान का आरोप।
  • तेल पर फिर पाबंदी: अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर दी गई अस्थायी राहत (General License) को वापस लिया।
  • ईरान में मिसाइल हमले: दक्षिणी ईरान के व्यावसायिक बंदरगाहों और द्वीपों पर गिरे प्रोजेक्टाइल, कई घायल।
  • पलटवार की चेतावनी: ईरान ने कहा- राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने को तैयार।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका के रवैये पर तीखा हमला बोला है। ईरान के मुताबिक:-

  • अनुच्छेद-10 का उल्लंघन: अमेरिकी वित्त विभाग ने 3 जुलाई 2026 को ईरान के तेल निर्यात पर दी गई अस्थायी छूट (जनरल लाइसेंस) को अचानक रद्द कर दिया। यह इस्लामाबाद समझौते के अनुच्छेद-10 का सीधा उल्लंघन है।
  • अविश्वसनीय अमेरिका: ईरान का कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर हुए अभी 20 दिन भी नहीं हुए थे कि अमेरिका अपने वादों से मुकर गया। यह अमेरिकी प्रशासन की ‘बुरी नीयत और अस्थिर नीति’ को दर्शाता है।
  • इजरायल का कनेक्शन: ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 20 दिनों में अमेरिका ने सीधे तौर पर या फिर लेबनान के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई को शह देकर इस शांति समझौते की शर्तों को बार-बार तार-तार किया है।

कूटनीतिक तकरार के बीच जमीन पर हालात बेहद हिंसक हो चुके हैं। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, दक्षिणी ईरान के तटीय और व्यापारिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है…

  1. सिरिक बंदरगाह पर हमला: सिरिक के एक बेहद व्यस्त व्यावसायिक बंदरगाह पर दुश्मन का एक प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या ड्रोन) आकर टकराया। इसके मलबे की चपेट में आने से कई स्थानीय लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए मिनाब अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
  2. केशम और बंदर अब्बास में हड़कंप: इन दोनों रणनीतिक ठिकानों पर भी धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं, जिन्हें अमेरिकी या सहयोगी ताकतों की कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है।

इस उल्लंघन और सैन्य हमलों के बाद ईरान का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इस फैसले के जो भी भयानक परिणाम होंगे, उसकी पूरी जिम्मेदारी अकेले अमेरिका की होगी। ईरान ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए ‘हर आवश्यक कदम’ उठाने का कानूनी अधिकार सुरक्षित रखता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समझौता पूरी तरह रद्द होता है, तो होर्मुज स्ट्रेट सहित पूरे खाड़ी देशों में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।

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