बिना एक भी कट के रिलीज़ हुई दिलजीत की विवादित फिल्म, लेकिन बदल गया नाम, जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?

नई दिल्ली: अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की लंबे समय से चर्चा में रही फिल्म ‘पंजाब 95’ आखिरकार नए नाम ‘सतलुज’ के साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज़ हो गई है। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित इस फिल्म की रिलीज़ लंबे समय से सेंसर और अन्य कारणों से टलती रही थी।

फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहन ने रिलीज़ के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि फिल्म में कोई कटौती नहीं की गई है और इसे उसी मूल रूप में दर्शकों तक पहुंचाया गया है, जैसा निर्माता और पूरी टीम चाहती थी। हालांकि, उन्हें फिल्म का पुराना नाम ‘पंजाब 95’ रखने की अनुमति नहीं मिल सकी, जिसके चलते इसका नया शीर्षक ‘सतलुज’ रखा गया।

हनी त्रेहन ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि जसवंत सिंह खालड़ा का जीवन उनके लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म न्याय के लिए उनके संघर्ष की कहानी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म के कंटेंट से कोई समझौता नहीं किया गया और दर्शकों तक पूरी फिल्म बिना किसी कट के पहुंची है।

निर्देशक ने दिलजीत दोसांझ और निर्माताओं का भी आभार जताते हुए कहा कि उनकी दृढ़ता की वजह से फिल्म अपने मूल स्वरूप में रिलीज़ हो सकी।

फिल्म रिलीज़ होने के बाद दिलजीत दोसांझ ने भी सोशल मीडिया पर अपने प्रशंसकों का धन्यवाद किया। उन्होंने लिखा कि यह फिल्म सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की है जिन्होंने इस पूरी यात्रा में उनका साथ दिया।

दिलजीत ने कहा कि टीम अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर कायम रही और किसी तरह का समझौता नहीं किया। उन्होंने स्वीकार किया कि फिल्म का पुराना नाम नहीं मिल सका, लेकिन अब ‘सतलुज’ के रूप में यह दर्शकों के सामने है।

इस फिल्म की रिलीज़ पिछले काफी समय से अटकी हुई थी। निर्देशक हनी त्रेहन पहले बता चुके हैं कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने शुरुआत में फिल्म में 21 कट लगाने को कहा था, लेकिन बाद में यह संख्या बढ़कर 120 से अधिक हो गई।

निर्देशक का कहना था कि कई ऐसे बदलाव भी सुझाए गए जिनका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उनसे फिल्म से जसवंत सिंह खालड़ा का नाम तक हटाने के लिए कहा गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

जसवंत सिंह खालड़ा पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता थे और शिरोमणि अकाली दल के मानवाधिकार प्रकोष्ठ के महासचिव रह चुके थे। उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों, हिरासत में मौतों और अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को सार्वजनिक किया था।

खालड़ा का दावा था कि अमृतसर, मजीठा और तरनतारन के श्मशान घाटों में बड़ी संख्या में ऐसे शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जिन्हें पुलिस लेकर आई थी और जिनकी पहचान नहीं की गई थी।

6 सितंबर 1995 को अमृतसर स्थित उनके घर से उनका अपहरण कर लिया गया। बाद में सीबीआई जांच में कहा गया कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने कथित साजिश के तहत उनका अपहरण किया, अवैध हिरासत में रखा और उनकी हत्या कर शव को हरिके क्षेत्र की नहर में फेंक दिया।

फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज़ पहले 7 फरवरी 2025 तय की गई थी और इसका टीज़र भी जारी हो चुका था, लेकिन बाद में रिलीज़ स्थगित कर दी गई। अब लंबे इंतजार के बाद यह फिल्म ‘सतलुज’ नाम से ओटीटी पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हो गई है।

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