बिहार में नशे का विस्फोट: शराबबंदी के बाद कैसे बढ़ा सूखे नशे का कारोबार?

बिहार में शराबबंदी लागू होने के करीब 10 साल बाद भी नशे का कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। शराब की तस्करी और जहरीली शराब से होने वाली घटनाओं के बीच अब राज्य में सूखे नशे यानी ड्रग्स का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। गांजा, स्मैक, हेरोइन, अफीम, डोडा, चरस, कोडीनयुक्त कफ सिरप और नशीली दवाओं की बड़ी खेप लगातार पकड़ी जा रही है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में ड्रग्स का नेटवर्क पहले से कहीं ज्यादा फैल चुका है और यह अब शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है।
2026 में अब तक भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद
बिहार पुलिस के अनुसार, साल 2026 में मई तक बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसमें 21,024.37 किलोग्राम गांजा, 54.048 किलोग्राम चरस, 51.9 किलोग्राम हेरोइन और स्मैक, 59.351 किलोग्राम अफीम शामिल है।
इसके अलावा 3,45,309 नशीले इंजेक्शन, 9,06,907 टैबलेट और कैप्सूल तथा 2,82,960 कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें भी बरामद की गई हैं। इस दौरान 89 कथित नशा तस्करों पर PIT-NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई भी की गई है।
शराबबंदी के बाद बढ़ा ड्रग्स का चलन
आंकड़ों की तुलना से साफ है कि 2015 के बाद से सूखे नशे की तस्करी में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। 2015 में जहां सीमित मात्रा में ही गांजा और अन्य नशे की बरामदगी होती थी, वहीं 2016 के शराबबंदी कानून के बाद इसमें तेज उछाल देखा गया।
2017 से लेकर 2025 तक हर साल हजारों किलो गांजा, सैकड़ों किलो हेरोइन और अफीम तथा लाखों की संख्या में नशीली दवाएं जब्त की गई हैं।
बिहार बना ड्रग्स ट्रांजिट कॉरिडोर
विशेषज्ञों के अनुसार बिहार अब ड्रग्स तस्करी का बड़ा ट्रांजिट कॉरिडोर बनता जा रहा है। नेपाल के साथ लगभग 700 किलोमीटर लंबी खुली सीमा और बंगाल, झारखंड व पूर्वोत्तर राज्यों से सटा होना तस्करों के लिए आसान रास्ता बनाता है।
किशनगंज, अररिया, सीतामढ़ी, मधुबनी और सुपौल जैसे सीमावर्ती जिले ड्रग्स सप्लाई के मुख्य केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
युवाओं में बढ़ता नशे का खतरा
रिपोर्टों के अनुसार बेरोजगारी, पलायन और सामाजिक तनाव के कारण बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। नशामुक्ति केंद्रों में इलाज कराने आने वालों में 18 से 35 वर्ष के युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल और कॉलेज स्तर तक नशे की पहुंच बढ़ना भी एक गंभीर चिंता का विषय है।
इंजेक्शन से फैलता संक्रमण
बिहार में नशीले इंजेक्शन के इस्तेमाल के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। इस साल मई तक 3.45 लाख से अधिक इंजेक्शन जब्त किए गए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार एक ही सिरिंज के इस्तेमाल से एचआईवी और अन्य संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
राज्य में पहले से ही एचआईवी के करीब 1.06 लाख मरीज हैं, जिनमें 11,836 मामले नशे की सुई के कारण संक्रमण से जुड़े बताए जाते हैं।
आसान ट्रांसपोर्ट और सस्ते नशे ने बढ़ाई चुनौती
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सूखे नशे की तस्करी शराब की तुलना में आसान और सस्ती है। छोटी पुड़िया, नशीली गोलियां और कफ सिरप आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि शराब की तस्करी में ज्यादा जोखिम होता है।
इसी कारण तस्कर अब ड्रग्स नेटवर्क को तेजी से बढ़ा रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
बढ़ता संकट और प्रशासनिक चुनौती
बिहार में शराबबंदी के बावजूद ड्रग्स का बढ़ता नेटवर्क राज्य प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार बरामदगी और गिरफ्तारी के बावजूद तस्करी का सिलसिला जारी है, जिससे साफ है कि यह एक संगठित और गहरा नेटवर्क बन चुका है।



