Global Oil Crisis: क्या फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? ईरान-US समझौते का ‘आर्टिकल-5’ बना दुनिया के लिए आफत, जानें पूरा विवाद

  • 17 जून को हुआ समझौता टूटा! होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही 40% तक घटी।
  • समझौते का ‘आर्टिकल-5’ बना विवाद की जड़, आमने-सामने आए अमेरिका और ईरान।
  • अमेरिकी हमलों और IRGC की चेतावनी के बाद वैश्विक तेल सप्लाई चेन पर मंडराया संकट।

नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) पर एक बार फिर मंदी और महंगाई का काला साया मंडराने लगा है।

दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।

दोनों देशों के बीच महज 12 दिन पहले (17 जून को) हुआ समझौता अब टूटता नजर आ रहा है, जिसकी मुख्य वजह समझौते का ‘आर्टिकल-5’ (Article-5) बन गया है। इस तनाव का सीधा असर समुद्री व्यापार पर पड़ा है, जहां बुधवार को गुजरने वाले 70 जहाजों की संख्या शनिवार तक घटकर महज 40 रह गई है।

समझौते के ‘आर्टिकल-5’ के मुताबिक ईरान को 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच कमर्शियल जहाजों को बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के सुरक्षित रास्ता देना था। साथ ही 30 दिनों के भीतर समुद्र में बिछाई गई सी-माइंस (Sea Mines) हटानी थीं।

विवाद की वजह: ईरान का साफ कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट का पूरा मैनेजमेंट और सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है, जबकि अमेरिका इसमें ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की एंट्री कराकर ईरान के दबदबे को खत्म करना चाहता है। ईरान इसे अपने संप्रभुता में सीधा दखल मान रहा है।

अमेरिका का ‘वैकल्पिक मार्ग’ और IRGC की चेतावनी

तनाव को बढ़ता देख अमेरिका ने ईरान को दरकिनार कर एक ‘वैकल्पिक समुद्री मार्ग’ तैयार करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। अमेरिका के इस कदम ने आग में घी का काम किया है।

इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने सख्त लहजे में चेतावनी जारी की है कि अंतरराष्ट्रीय जहाज केवल ईरान के तय किए गए उत्तरी समुद्री मार्ग से ही गुजरें। इस पाबंदी के डर से ‘एवर लवली’ और ‘किकू’ नाम के जहाजों समेत कई तेल टैंकरों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश फुल-स्केल वॉर से बचना चाहते हैं, लेकिन होर्मुज का यह चोक-पॉइंट कभी भी सुलग सकता है।

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