ममता बनर्जी का बड़ा पलटवार! फिरहाद हकीम समेत 8 बागी नेता पार्टी से निष्कासित, तृणमूल में आर-पार की जंग

Trinamool Congress Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर छिड़ा आंतरिक घमासान अब एक बड़े विभाजन (Split) में बदल चुका है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक गुट ने मंगलवार को बागी नेताओं के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। ममता बनर्जी ने कोलकाता के पूर्व मेयर व पूर्व मंत्री फिरहाद हकीम सहित 8 दिग्गज बागी नेताओं को पार्टी से निष्कासित (Expel) कर दिया है।

यह फैसला तब आया है जब महज एक दिन पहले बागी गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी के चेयरपर्सन पद से “हटाने” का एकतरफा ऐलान किया था।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने बागियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने के कुछ ही घंटों बाद इन सभी को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इन नेताओं पर “जानबूझकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने” का आरोप है:

  1. फिरहाद हकीम (पूर्व मेयर और पूर्व मंत्री)
  2. अरूप रॉय (अनुभवी विधायक)
  3. जावेद अहमद खान
  4. रथिन घोष
  5. बिप्लब मित्रा
  6. सबीना यास्मीन
  7. अरूप बिस्वास
  8. स्नेहाशीष चक्रवर्ती

इस विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई जब विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे ने टीएमसी के एक ‘स्पेशल सेशन’ में नए लीडरशिप स्ट्रक्चर की घोषणा कर दी।

  • चेयरपर्सन पद से हटाया: बागियों ने साल 1998 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल की स्थापना करने वाली ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटा दिया।
  • अरूप रॉय बने नए अध्यक्ष: ममता की जगह अनुभवी विधायक अरूप रॉय को सर्वसम्मति से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुन लिया गया।
  • वर्किंग कमेटी का गठन: बागियों ने 30 सदस्यों वाली एक नई नेशनल वर्किंग कमेटी (NWC) बनाई, जिसमें फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास को वाइस-चेयरपर्सन नियुक्त किया गया। इस कमेटी में उन्होंने ममता बनर्जी को पार्टी का “मेंटर” बनने का प्रस्ताव दिया था, जिसे ममता गुट ने ठुकरा दिया।

ममता बनर्जी के इस तीखे पलटवार के बाद अब दोनों गुटों के बीच असली ताकत (Numbers Game) की आजमाइश शुरू हो गई है। बागी गुट के दावे टीएमसी के लिए बेहद चिंताजनक हैं:

  • विधायकों का समर्थन: बागी नेताओं का दावा है कि टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से कम से कम 60 विधायकों का समर्थन उनके पास है।
  • सांसदों का टूटना: पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद पहले ही अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में शामिल हो चुके हैं (इस पार्टी ने 2023 में त्रिपुरा चुनाव लड़ा था, लेकिन खाता नहीं खोल सकी थी)।

ऋतब्रत बनर्जी ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में वे समानांतर रूप से नई जिला समितियां और जिला अध्यक्षों की घोषणा भी करेंगे। इस बड़ी टूट के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब कानूनी और संवैधानिक संकट खड़ा होना तय माना जा रहा है।

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