Ghaziabad Murder: गोल्ड मेडलिस्ट पैरा एथलीट चिराग त्यागी की हत्या, पैरा ओलंपिक खिलाड़ी ने ही मारी गोली
जुबिली स्पेशल डेस्क
अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने का सपना देखने वाले 24 वर्षीय पैरा एथलीट चिराग त्यागी की बेरहमी से हत्या ने पूरे खेल जगत को झकझोर कर रख दिया है। महज दो दिन पहले गोल्ड मेडल जीतने वाले इस उभरते खिलाड़ी को उसके ही पुराने दोस्त और साथी पैरा एथलीट ने गोली मार दी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी यश खटीक ने खेल से जुड़े एक पुराने विवाद और शिकायत का बदला लेने के लिए इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किए गए यश ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर
पुलिस के मुताबिक, चिराग और यश स्कूल के दिनों से एक-दूसरे को जानते थे और ‘ब्लाइंड कैटेगरी’ में साथ ट्रेनिंग करते थे। कुछ समय पहले डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान चिराग ने यश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद यश का क्वालिफिकेशन रद्द हो गया। इसी बात से नाराज होकर यश ने बदले की साजिश रची और अवैध पिस्तौल का इंतजाम कर चिराग की हत्या कर दी।
गोल्ड से मौत तक… 48 घंटे में खत्म हुआ सपना
चिराग त्यागी गाजियाबाद के मुरादनगर क्षेत्र के बसंतपुर सैंथली गांव के रहने वाले थे। उन्होंने हाल ही में बेंगलुरु में राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था। इस उपलब्धि के बाद उनका चयन अक्टूबर में जापान में होने वाले पैरा एशियन गेम्स के लिए हुआ था। परिवार में जश्न का माहौल था, जो अब मातम में बदल गया है।
हॉस्टल जाने निकले, मिला शव
बुधवार सुबह चिराग घर से हॉस्टल जाने की बात कहकर निकले थे, लेकिन दोपहर तक उनका कोई संपर्क नहीं हुआ। बाद में साईं कुंज इलाके में एक युवक का शव मिलने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों ने शव की पहचान चिराग के रूप में की। शुरुआती जांच में ही हत्या की आशंका जताई गई थी।
पुलिस जांच जारी, और भी एंगल की तलाश
गाजियाबाद पुलिस के डीसीपी धवल जायसवाल के मुताबिक, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल की तलाश की जा रही है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि क्या इस साजिश में कोई और भी शामिल था।
एक उभरते खिलाड़ी की इस तरह हत्या ने खेल व्यवस्था और खिलाड़ियों के बीच बढ़ते तनाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सिस्टम में शिकायत और प्रतिस्पर्धा अब जानलेवा होती जा रही है?

