17 वर्षीय छात्र की जाँच ने CBSE में मचाई  हलचल: कोएम्प्ट एड्यूटेक को काम देने के लिए बदले नियम?

 

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षा मूल्याङ्कन में हुयी गडबडियों ने पूरे देश का ध्यान खींचा है , लेकिन एक छात्र ने ऐसा दावा किया है जिसके बाद एक गंभीर मंथन शुरू हो गया है, 17 वर्षीय कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत की खुद की की गई जाँच ने पुरे सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं । झारखण्ड निवासी इस विद्यार्थी ने अपने ब्लॉग में दावा किया है कि CBSE ने कक्षा 12 के उत्तर पत्रों के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) ठेके के लिए टेंडर प्रक्रिया में जानबूझकर नियम बदले ताकि हैदराबाद स्थित Coempt Eduteck नामक कंपनी को लाभ मिल सके।

सार्थक सिद्धांत ने अपने ब्लॉग में टेंडर दस्तावेजों का गहराई से विश्लेषण किया और पाया कि CBSE ने तीन अलग-अलग चरणों में टेंडर की पात्रता शर्तों को धीरे-धीरे कम किया। मूल टेंडर में 5 वर्ष का अनुभव और 50 करोड़ रुपये का न्यूनतम वार्षिक टर्न ओवर मांगा गया था, लेकिन अंतिम चरण में यह घटाकर क्रमशः 2 वर्ष और 15 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस बदलाव के बाद Coempt Eduteck, जिसके पास केवल 2 वर्ष का अनुभव था, पात्र हो सका, जबकि अन्य 15-20 कंपनियों को बाहर होना पड़ा।

इस ब्लॉग ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होकर राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं ने इस ब्लॉग का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्रालय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने CBSE की स्वतंत्र जाँच की मांग की है, क्योंकि इस मामले में सरकारी ठेकों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

CBSE ने सार्थक के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि Coempt Eduteck को कभी भी टेंडर से अयोग्य नहीं घोषित किया गया था, इसलिए नियम बदलने का आरोप बेतुका है। बोर्ड के स्रोतों ने दावा किया कि सभी कंपनियाँ शुरू से ही पात्र थीं और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है। Coempt Eduteck ने भी किसी गड़बड़ी का खंडन करते हुए कहा कि वे मानक प्रक्रिया का पालन करके चुनी गई हैं।

यह मामला भारतीय शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी ठेकों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाता है। यदि CBSE ने वास्तव में टेंडर नियम बदले हैं, तो यह भविष्य के सभी सरकारी ठेकों के लिए चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले की स्वतंत्र जाँच आवश्यक है ताकि छात्रों और जनता के भरोसे पर आंच न आए।

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