राहुल गांधी के कमरे में 35 मिनट तक क्या हुआ? सीएम सिद्धारमैया के साथ ‘वन-टू-वन’ बैठक से मची खलबली

कर्नाटक की सियासत में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। सूबे की सरकार के दोनों शीर्ष कर्णधार— मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इस समय देश की राजधानी दिल्ली में हैं। दिल्ली स्थित कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में बैठकों का मैराथन दौर जारी है, जिसने राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीतिक हलचल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अपने व्यक्तिगत कमरे में लेकर गए और दोनों नेताओं के बीच ‘वन-टू-वन’ (अकेले में) बेहद संवेदनशील बातचीत हुई।

media को कांग्रेस मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली इनसाइड स्टोरी के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को मुख्य बैठक में शामिल करने से पहले आलाकमान ने खुद एक बेहद गोपनीय बैठक की।

आलाकमान का मोर्चा: पहले राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला ने करीब दो घंटे तक बंद कमरे में गहन चर्चा की।

  • कामकाज का रिपोर्ट कार्ड: इस शुरुआती बैठक के दौरान कर्नाटक के पार्टी प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने आलाकमान को कर्नाटक सरकार के कामकाज, मंत्रियों के परफॉर्मेंस और संगठन की स्थिति को लेकर एक विस्तृत व सीक्रेट रिपोर्ट सौंपी।
  • इंतजार का सस्पेंस: जब आलाकमान के बीच यह दो घंटे की महाबैठक चल रही थी, तब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार बाहर एक साथ बैठकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

आंतरिक मंथन समाप्त होने के बाद, सबसे पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अंदर बुलाया गया। शीर्ष नेताओं के साथ उनकी यह संयुक्त बैठक करीब आधे घंटे (30 मिनट) तक चली, जिसमें सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर चर्चा हुई।

सबसे बड़ा कूटनीतिक एंगल: संयुक्त बैठक खत्म होते ही राहुल गांधी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अलग से अपने कमरे में ले गए। सूत्रों के मुताबिक, राहुल और सिद्धारमैया के बीच बंद कमरे में अकेले 35 मिनट से अधिक समय तक बातचीत चली। इस ‘वन-टू-वन’ बैठक ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है कि क्या कर्नाटक कैबिनेट में कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है या नेतृत्व को लेकर कोई नई रणनीति तैयार की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह से डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया को दिल्ली तलब किया गया है और सुरजेवाला की रिपोर्ट पर दो घंटे तक मल्लिकार्जुन खरगे व राहुल गांधी ने माथापच्ची की है, वह यह साफ इशारा करता है कि कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। राहुल गांधी की सिद्धारमैया के साथ हुई यह 35 मिनट की एकांत बैठक ही कर्नाटक की आगामी राजनीति की दिशा और दशा तय करेगी।

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