समंदर में छिपी जंग: US Blockade को चकमा देकर निकला ईरान का ‘Huge’ टैंकर, अमेरिका भी नहीं लगा पाया सुराग!

जुबिली स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली/सिंगापुर: समंदर के सीने पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे ‘लुका-छिपी’ के खेल में इस बार तेहरान ने बाजी मार ली है। वाशिंगटन की सख्त समुद्री नाकेबंदी और हाई-टेक निगरानी को धुआं दिखाते हुए ईरान का एक विशालकाय तेल टैंकर (Supertanker) दक्षिण-पूर्व एशिया पहुंच गया है। इस घटना ने अमेरिकी नौसेना की चौकसी और उसके खुफिया तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाली संस्था ‘टैंकर ट्रैकर्स’ के मुताबिक, इस एक जहाज की कामयाबी से ईरान के खजाने में करीब 220 मिलियन डॉलर (लगभग 1800 करोड़ रुपये) आने वाले हैं।
रडार से गायब होकर बना ‘घोस्ट शिप’ (Ghost Ship)
अमेरिकी घेराबंदी को तोड़ने के लिए ईरान ने इस बार अपनी ‘घोस्ट फ्लीट’ तकनीक का सहारा लिया। जहाज, जिसका नाम ‘HUGE’ है, ने अपनी पहचान छिपाने के लिए शातिर चाल चली
- AIS सिस्टम बंद: 20 मार्च को मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के पास पहुंचते ही इस टैंकर ने अपना ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (AIS) बंद कर दिया।
- डार्क एक्टिविटी: बिना सिग्नल के समंदर में आगे बढ़ने को ‘डार्क एक्टिविटी’ कहा जाता है। रडार की नजरों से ओझल होकर यह जहाज एक ‘भूतिया जहाज’ की तरह हफ्तों तक चलता रहा।
- लोकेशन: इसे आखिरी बार श्रीलंका के पास देखा गया था, लेकिन अब यह इंडोनेशिया के लोम्बोक स्ट्रेट से होते हुए रियाउ द्वीपसमूह की ओर बढ़ रहा है।
45 हजार करोड़ का झटका, फिर भी बच निकला ‘HUGE’
अमेरिका ने 13 अप्रैल से ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए सख्त समुद्री नाकेबंदी शुरू की थी। आंकड़ों की मानें तो इस कार्रवाई से ईरान को अब तक 4.8 अरब डॉलर (करीब 45,000 करोड़ रुपये) का राजस्व घाटा हो चुका है।
लेकिन, ‘HUGE’ टैंकर का बच निकलना यह साबित करता है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों (मलक्का और लोम्बोक स्ट्रेट) में आज भी ऐसी ‘खामियां’ मौजूद हैं, जिसका फायदा उठाकर प्रतिबंधित देश अपनी अर्थव्यवस्था चला रहे हैं। इस टैंकर में करीब 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लदा हुआ है।
दुनिया के लिए क्या है इसके मायने?
स्ट्रेट ऑफ मलक्का दुनिया का सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्ग है। यहां से एक विशालकाय टैंकर का बिना सिग्नल के गुजरना न केवल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, बल्कि यह चीन और अन्य एशियाई देशों को तेल की गुप्त सप्लाई का संकेत भी है। अमेरिका ने फिलहाल इस ‘सुरक्षा चूक’ पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे आने वाले दिनों में समंदर में तनाव और बढ़ेगा।


