ईरान-अमेरिका जंग पर ‘सस्पेंस’ बरकरार: 48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे अरागची; ट्रंप ने ठुकराया तेहरान का ‘शांति प्रस्ताव’?

इस्लामाबाद/वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची मंगलवार को एक बार फिर पाकिस्तान पहुंचे हैं। गौरतलब है कि पिछले 48 घंटों के भीतर यह उनका तीसरा पाकिस्तान दौरा है, जो इस बात का संकेत है कि तेहरान युद्ध विराम के लिए किसी बड़े ‘मध्यस्थ’ की तलाश में है।
अरागची का ‘मैराथन’ दौरा: रूस, ओमान और अब पाकिस्तान
इस्लामाबाद पहुंचने से पहले अरागची ने रूस और ओमान की यात्रा की। जानकारों का मानना है कि अरागची का बार-बार पाकिस्तान आना यह दर्शाता है कि ईरान इस संकट का जल्द समाधान चाहता है।
- रेड लाइन दस्तावेज: पिछली यात्रा के दौरान अरागची ने पाकिस्तान को एक ‘रेड लाइन’ दस्तावेज सौंपा था, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान की सख्त शर्तें शामिल थीं।
पुतिन-अरागची मुलाकात: रूस का मिला साथ
इससे पहले सेंट पीटर्सबर्ग में अरागची और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब डेढ़ घंटे लंबी बैठक हुई।
- रणनीतिक साझेदारी: अरागची ने इस बैठक को “अत्यंत सफल” बताया और कहा कि रूस हर मोर्चे पर ईरान के साथ खड़ा है।
- पुतिन का रुख: राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस पश्चिम एशिया में शांति बहाली की कोशिशों का समर्थन करता है और ईरान के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
व्हाइट हाउस में चर्चा: ट्रंप को मंजूर नहीं ईरान की ‘शर्तें’
ईरान ने युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का एक औपचारिक प्रस्ताव अमेरिका को भेजा है। हालांकि, इस प्रस्ताव ने वाशिंगटन में असंतोष पैदा कर दिया है।
- प्रस्ताव की शर्त: ईरान चाहता है कि पहले युद्ध खत्म हो और समुद्री व्यापार बहाल हो, जबकि परमाणु मुद्दे पर बातचीत भविष्य के लिए टाल दी जाए।
- ट्रंप की प्रतिक्रिया: व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ इस पर चर्चा की है। ‘रायटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप इस प्रस्ताव से खुश नहीं हैं क्योंकि इसमें परमाणु कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं है।
समझौते की राह में सबसे बड़ा रोड़ा क्या है?
समझौता न हो पाने की मुख्य वजह दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर है:
- ईरान का रुख: तेहरान की मांग है कि पहले खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सुचारू हो और युद्ध रुके, परमाणु मुद्दा उसके बाद की प्राथमिकता है।
- अमेरिका की मांग: ट्रंप प्रशासन चाहता है कि परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने की चर्चा पहले दिन से ही समझौते का हिस्सा हो।
क्या पाकिस्तान सुलझाएगा ईरान-अमेरिका का झगड़ा? ईरान के विदेश मंत्री की 48 घंटे में तीसरी पाकिस्तान यात्रा ने दुनिया का ध्यान खींचा है। जहाँ रूस खुलकर ईरान के साथ खड़ा है, वहीं ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को अधूरा बताया है। जानिए क्या है वो ‘रेड लाइन’ दस्तावेज और क्यों परमाणु मुद्दे पर अटका है समझौता।



