बिहार में ‘सम्राट’ युग का उदय: विश्वास मत के साथ ही ‘नया बिहार’ बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार

पटना: बिहार विधानसभा में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सम्राट चौधरी की सरकार ने विशेष सत्र के दौरान विश्वास मत (Trust Vote) हासिल कर लिया है। लेकिन सदन की कार्यवाही केवल नंबर गेम तक सीमित नहीं रही; यह सत्ता पक्ष के ‘महा-संकल्प’ और विपक्ष के ‘तीखे प्रहारों’ का अखाड़ा बन गई।
सम्राट का ‘मिशन बिहार’: एयरपोर्ट से लेकर सीतापुरम तक
बहुमत साबित करने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जो घोषणाएं कीं, उन्होंने भविष्य के बिहार की एक महत्वाकांक्षी तस्वीर पेश की। सम्राट ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ‘Triple C’ (क्राइम, कम्युनलिज्म और करप्शन) पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी।
सरकार के बड़े विजन के मुख्य बिंदु:
- शिक्षा में क्रांति: “बड़े नेताओं के बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे।” प्राइवेट स्कूलों के बढ़ते वर्चस्व को कम करने और सरकारी शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने पर ज़ोर।
- कनेक्टिविटी: हर जिले में एयरपोर्ट का सपना, और जहाँ मुमकिन न हो वहाँ हेलीपैड का निर्माण।
- शहरी विकास: पटना के पास 6000 एकड़ में अत्याधुनिक ‘पाटलिपुत्र टाउनशिप’ का निर्माण।
- सांस्कृतिक पहचान: सीतामढ़ी का नाम बदलकर ‘सीतापुरम’ करने और सोनपुर में ‘हरिहरनाथ कॉरिडोर’ बनाने का ऐलान।
- सुरक्षा और राहत: महिला संस्थानों के बाहर विशेष पुलिस तैनाती और रोड एक्सीडेंट में मौत पर ₹4 लाख का मुआवजा।
तेजस्वी का तंज: “इलेक्टेड नहीं, सिलेक्टेड सीएम हैं सम्राट”
सदन में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने पुराने अंदाज़ में नज़र आए। उन्होंने सम्राट चौधरी पर हमला करते हुए उन्हें “लालू की पाठशाला का विद्यार्थी” बताया। तेजस्वी ने कटाक्ष किया कि बिहार एक ‘अजूबा राज्य’ बन गया है जहाँ 5 साल में 5 बार सरकारें बदल जाती हैं। तेजस्वी ने सरकार की स्थिरता और आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए..
खजाने पर सफाई: कर्ज है, पर कंगाली नहीं
तेजस्वी के ‘खाली खजाने’ वाले आरोपों पर डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव ने मोर्चा संभाला। उन्होंने स्वीकार किया कि सरकार कर्ज लेती है और उसकी एक तय सीमा होती है, लेकिन यह कहना गलत है कि खजाना पूरी तरह खाली है। विकास कार्यों के लिए वित्तीय प्रबंधन मजबूती से किया जा रहा है।
क्या बिहार को मिलेगी ‘स्टेबिलिटी’?
सम्राट चौधरी ने अपनी पहली अग्निपरीक्षा पार कर ली है। जहाँ विपक्ष इसे ‘अस्थिरता का दौर’ बता रहा है, वहीं भाजपा नेतृत्व वाली यह नई सरकार राज्य के हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज और किसानों के लिए सिंचाई की सुविधाओं जैसे वादों के साथ जनता के बीच जाने को तैयार है।
देखना दिलचस्प होगा कि ‘सम्राट की पगड़ी’ और ‘बिहार की प्रगति’ का यह तालमेल 2025 के आगामी चुनावों में क्या रंग लाता है।


