शिक्षा और स्वास्थ्य में बदलाव की नई मिसाल: निहिलेंट ने भारत में सीएसआर पहलों के जरिए बदली वंचित बच्चों की किस्मत

पुणे/नई दिल्ली। वैश्विक कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी सर्विस कंपनी निहिलेंट (Nihilent) ने भारत में अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के दायरे को बढ़ाते हुए समाज के वंचित वर्गों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण निवेश किया है। कंपनी ने ‘मानव-केंद्रित विकास’ के अपने दृष्टिकोण के तहत डिजिटल साक्षरता और बच्चों की हृदय संबंधी चिकित्सा (Pediatric Cardiac Care) को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

निहिलेंट ने पुणे स्थित भटक्या विमुक्त जाती शिक्षण संस्था (BVJSS) के आवासीय स्कूल के साथ मिलकर एक बड़ी पहल की है।

  • स्मार्ट लर्निंग: कंपनी ने यहाँ इंटरनेट से लैस एक अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की है।
  • कौशल विकास: एक विशेष ‘डिजिटल साक्षरता पाठ्यक्रम’ शुरू किया गया है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर और घुमंतू समुदायों के बच्चे भविष्य की तकनीक आधारित दुनिया के लिए तैयार हो सकें।
  • बुनियादी ढांचा: डिजिटल शिक्षा के साथ-साथ, कैंपस में आधुनिक स्वच्छता सुविधाएं (Sanitation) और पोषण संबंधी सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य जोखिमों में कमी आई है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में निहिलेंट ने श्री सत्य साई संजीवनी अस्पतालों (नवी मुंबई और यवतमाल) के साथ साझेदारी की है।

  • जीवनरक्षक उपकरण: कंपनी ने अस्पतालों को उन्नत एनेस्थीसिया मशीनें और आईसीयू मॉनिटरिंग सिस्टम उपलब्ध कराए हैं।
  • मुफ्त सर्जरी: इस सहयोग के माध्यम से जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease) से पीड़ित गरीब परिवारों के बच्चों की ‘पेडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी’ बिना किसी खर्च के मुफ्त में की जा रही है।

समावेशन (Inclusion) की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए निहिलेंट ने अयोध्या चैरिटेबल ट्रस्ट के साथ हाथ मिलाया है। यह ट्रस्ट सुनने में अक्षम (बधिर) बच्चों के लिए स्कूल संचालित करता है।

मुख्य सहयोग: निहिलेंट इन बच्चों को डिजिटल हियरिंग एड (सुनने की मशीन), विशेष शिक्षक और कंप्यूटर प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मुहैया करा रहा है ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

“समान भविष्य का निर्माण” – एल.सी. सिंह

इन पहलों पर टिप्पणी करते हुए निहिलेंट के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एल.सी. सिंह ने कहा: “हम टेक्नोलॉजी को सिर्फ व्यवसाय का साधन नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर बढ़ाने का माध्यम मानते हैं। हमारा उद्देश्य समुदायों को सशक्त बनाकर ऐसा स्थायी प्रभाव पैदा करना है, जहाँ कोई भी बच्चा अपनी पृष्ठभूमि की वजह से पीछे न रह जाए। हमारी हर पहल सहानुभूति और समाज की वास्तविक जरूरतों पर आधारित है।”

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