NCERT की 8वीं की किताब पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिना शर्त माफी फिलहाल नामंजूर

जुबिली स्पेशल डेस्क
एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सोशल साइंस पुस्तक को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अदालत फिलहाल बिना शर्त माफी स्वीकार नहीं करेगी और यह जांच की जाएगी कि संबंधित सामग्री किस परिस्थिति में प्रकाशित हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने विवादित अध्याय पर रोक लगाते हुए पुस्तक की प्रतियों के प्रकाशन और डिजिटल प्रसार पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। अदालत ने भौतिक प्रतियां जब्त करने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि किसी भी रूप में सामग्री साझा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) ने अदालत को बताया कि बाजार में भेजी गई पुस्तक की प्रतियां वापस ली जा रही हैं। इस पर सीजेआई ने टिप्पणी की कि यह गंभीर मामला है और इसकी गहन जांच आवश्यक है। न्यायमूर्ति बागची ने भी कहा कि डिजिटल युग में सामग्री तेजी से फैलती है, इसलिए यह जानना जरूरी है कि यह सामग्री किस प्रक्रिया से प्रकाशित हुई।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता और जब तक जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान नहीं हो जाती, तब तक जांच जारी रहेगी।
विवाद किस बात पर?
24 फरवरी 2026 को एनसीईआरटी ने कक्षा 8 के लिए Exploring Society: India and Beyond, Vol II नामक पुस्तक जारी की थी। इसमें ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक अध्याय में न्यायपालिका और लंबित मामलों को लेकर कुछ सामग्री प्रकाशित की गई थी, जिस पर आपत्ति जताई गई।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस पर संज्ञान लेते हुए पुस्तक के वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एनसीईआरटी ने बिक्री रोक दी और बयान जारी कर कहा कि संबंधित सामग्री अनजाने में शामिल हो गई थी। संस्था ने न्यायपालिका के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए खेद भी प्रकट किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले की गहन जांच कराई जाएगी और आवश्यक वैधानिक प्रावधानों का उपयोग किया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका संविधान की संरक्षक है और उसकी गरिमा की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।


