जुबिली स्पेशल डेस्क
पिछले कुछ वर्षों में भारत सहित दुनिया भर में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। आमतौर पर इसे नियंत्रित रखने के लिए रोजाना दवाएं लेनी पड़ती हैं।
लेकिन एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि साल में केवल दो इंजेक्शन लेकर भी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखा जा सकता है।
वैज्ञानिक आरएनए तकनीक पर आधारित एक नई थेरेपी पर काम कर रहे हैं। इस तकनीक से तैयार इंजेक्शन शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले हार्मोन एंजियोटेंसिन के उत्पादन को कम करने का काम करता है।
रिसर्च, जो American Heart Association और प्रतिष्ठित जर्नल The Lancet में प्रकाशित हुई है, के मुताबिक साल में दो बार दिया जाने वाला यह इंजेक्शन हाई बीपी को प्रभावी ढंग से कंट्रोल कर सकता है। यह इंजेक्शन उस प्रोटीन को ब्लॉक करता है, जो रक्तचाप बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह थेरेपी खासतौर पर उन मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें रोज दवा लेने में परेशानी होती है या जो दवा लेना भूल जाते हैं।

क्या बाजार में उपलब्ध है यह दवा?
फिलहाल यह इंजेक्शन केवल क्लीनिकल ट्रायल चरण में है। इसे व्यापक स्तर पर मंजूरी मिलने से पहले और बड़े पैमाने पर शोध की जरूरत है। अभी यह आम मरीजों के लिए उपलब्ध नहीं है। शुरुआती परीक्षणों में इसे सुरक्षित पाया गया है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष विस्तृत अध्ययन के बाद ही सामने आएंगे।
World Health Organization के अनुसार, दुनियाभर में 1.4 अरब से अधिक लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 44% लोगों को यह तक पता नहीं होता कि वे इस बीमारी से जूझ रहे हैं। कई मामलों में किसी अन्य बीमारी की जांच के दौरान हाई बीपी का पता चलता है।
रिसर्च पूरी होने पर संभावित फायदे
- रोजाना दवा लेने की आवश्यकता कम हो सकती है
- ब्लड प्रेशर लंबे समय तक नियंत्रित रह सकता है
- साल में केवल दो इंजेक्शन की जरूरत
- स्ट्रोक और हृदय रोग के जोखिम में कमी संभव
हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जब तक यह थेरेपी पूरी तरह स्वीकृत न हो जाए, तब तक मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित दवाएं लेते रहें और जीवनशैली में सुधार पर ध्यान दें।
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