Tuesday - 1 December 2020 - 5:09 AM

सूबे के 24 सुस्त नौकरशाह !

राजेंद्र कुमार

नाव मजबूत हो तो मल्लाह चढ़ती नदी में भी आसानी से नाव को दूसरे किनारे पर ले जाने में सफल होता हैं। और अगर नौकरशाह काबिल हों तो उनके सहयोग से मुख्यमंत्री हर संकट पर आसानी से जीत हासिल कर लेता हैं।

सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके कल्याण सिंह अपनी सरकार ही उपलब्धियों का बखान करते हुए अक्सर अपने इस अनुभव को साझा करते हैं। उनके इस अनुभव के आधार पर यदि यूपी में नौकरशाही की वर्किंग पर ध्यान दिया जाये तो लगता है कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कुछ बड़े नौकरशाहों का वाजिब सहयोग नहीं मिल पा रहा हैं। इन बड़े नौकरशाहों की काहिली का खामियाजा राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

बीते दिनों इसके कुछ-कुछ संकेत भी मिले हैं। तमाम लोगों को यह पता चला कि वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली छमाही बीत गई है, लेकिन यूपी में सरकारी खर्च रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।

जबकि सरकार के स्तर से बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के लिए निर्माण एजेंसी को हर दो महीने की आवश्यकता का बजट बिना मांगे ही दिया जा रहा है, लेकिन 24 विभागों के मुखियाओं जो अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के अफसर हैं, इन लोगों ने मिले बजट को खर्च करने में घोर सुस्ती दिखाई हैं।

या ऐसे कहें कि बजट खर्च करने में इन विभागों के हाकिम काहिली बरत रहें हैं। जिसके चलते अभी तक सूबे का आधा बजट भी खर्च नहीं हो सका है।

सरकारी खर्च पर निगाह रखने वाले वित्त विभाग के अफसरों के मुताबिक सूबे का आधा बजट छह महीने में खर्च होना चाहिए था, लेकिन बीते सितंबर तक एक चौथाई बजट भी अभी खर्च नहीं हुआ है।

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वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार राज्य में 86 विभाग हैं, इनमें से करीब 24 विभाग ऐसे हैं जिन्होंने बीते सितंबर तक जारी हुई बजट राशि में से 50 प्रतिशत से भी कम राशि खर्च की है। जबकि करीब तीस विभाग ऐसे हैं, जिन्होंने जारी बजट राशि का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बीते गए सितंबर तक खर्च कर डाला।

अब तय हुआ है कि जिन 24 विभागों ने बीते सितंबर तक जारी हुई बजट राशि में से 50 प्रतिशत से भी कम राशि खर्च की है, उनके मुखियाओं से मुख्यमंत्री सीधे इसकी वजह पूछेंगे। मुख्यमंत्री इन 24 विभागों के आला अफसरों से यह जानना चाहेंगे कि जब कोरोना संकट के दौरान 30 से अधिक विभागों ने 50 फीसदी से अधिक बजट राशि बीते सात महीनों में खर्च कर डाली तो आखिर वह ऐसा क्यों नहीं कर सके।

अब इस संभावित पूछताछ को लेकर 24 विभागों के आला अफसर थोडा भयभीत हैं। यह 24 नौकरशाह कौन है? इसकी सूची तमाम अफसरों ने वित्त विभाग से प्राप्त कर ली है। इनमें मुख्यमंत्री के कई चहेते अफसर भी शामिल हैं। जिसके चलते अब लोकभवन तथा सचिवालय के अन्य भवनों में बैठने वाले तमाम आईएएस अफसरों के बीच यह चर्चा हो रही है कि जिन विभागों में 50 फीसदी से कम बजट राशि खर्च हुई है, उनके मुखियाओं के खिलाफ सीएम एक्शन लेंगे?

क्या मुख्यमंत्री इन 24 अफसरों के खिलाफ कोई सख्त एक्शन लेंगे, ताकि फिर ऐसी स्थिति का सामना दोबारा राज्य को न करना पड़े और अधिकारी भी सुस्ती छोड़कर अपने कार्य पर ध्यान दें। यह इन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा? अब देखना यह है कि इस मामले में मुख्यमंत्री का निर्णय क्या होगा ?

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