अंजू महेंद्रू से इश्क, खुमारी में बैटिंग और 1,000 विकेट का इतिहास; अलविदा क्रिकेट के शहंशाह सर गैरी सोबर्स!

अशोक बांबी

सर डॉन ब्रैडमैन जैसे महान खिलाड़ी के बाद अगर क्रिकेट इतिहास में किसी दूसरे खिलाड़ी का नाम अदब से लिया जाता है, तो वो हैं सर गारफील्ड सोबर्स।
कल इस महानतम ऑलराउंडर का लगभग 90 वर्ष की आयु में बारबाडोस में निधन हो गया। सोबर्स का नाम जेहन में आते ही एक ऐसे चपल खिलाड़ी की छवि सामने आ जाती है, जिसने खेल के हर क्षेत्र में विशेष महारत हासिल की हो। बल्लेबाजी हो, तेज या स्पिन गेंदबाजी हो या फिर फील्डिंग-हर मोर्चे पर उनकी निपुणता देखते ही बनती थी।

महज 16 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक गेंदबाज के रूप में कदम रखा था, लेकिन शीघ्र ही उन्होंने खुद को एक बेहतरीन बल्लेबाज के रूप में स्थापित कर लिया।
पाकिस्तान के खिलाफ जब उन्होंने सर लैन हटन (Len Hutton) के 364 रनों का रिकॉर्ड तोड़ा, तो उनका यह वर्ल्ड रिकॉर्ड 36 वर्षों तक कायम रहा।
बाद में उन्हीं के देश के ब्रायन लारा ने इस रिकॉर्ड को तोड़ा था। नॉटिंघमशायर की तरफ से खेलते हुए बाएं हाथ के स्पिनर मैल्कम नैश (Malcolm Nash) के एक ओवर में 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम दर्ज है। बाद में भारत के रवि शास्त्री ने तिलक राज की गेंदों पर इस रिकॉर्ड की बराबरी की थी।
वैसे तो उन्होंने अपने करियर में अनगिनत रिकॉर्ड बनाए, लेकिन उनके खेलने की आक्रामक और कलात्मक शैली से क्रिकेट विशेषज्ञ सबसे ज्यादा प्रभावित थे।
लगभग 20 सालों तक उन्होंने अपने खेल और बेमिसाल कप्तानी की बदौलत वेस्टइंडीज टीम को दुनिया में शीर्ष पर बनाए रखा।
टेस्ट क्रिकेट में 8,000 से ज्यादा रन, 235 विकेट और 100 से ऊपर कैच लेकर उन्होंने एक बेहतरीन ऑलराउंडर की जो परिभाषा लिखी, वह आज तक कायम है। जो चपलता उन्होंने खेल के हर पहलू में दिखाई, वह फिर किसी अन्य खिलाड़ी में देखने को नहीं मिली।
सर गैरी के जीवन और करियर से जुड़े कुछ अन्य दिलचस्प पहलुओं पर गौर करें तो, वे सबसे पहले एक प्रोफेशनल खिलाड़ी के तौर पर लंकाशायर लीग में खेले थे।
इसके बाद वे नॉटिंघमशायर की तरफ से कई सालों तक काउंटी क्रिकेट खेलते रहे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में साउथ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से भी शिरकत की और विश्व एकादश (World XI) की कप्तानी भी संभाली।
अपने पूरे प्रथम श्रेणी करियर में कुल 86 शतक लगाकर और 1,000 से ऊपर विकेट चटकाकर उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहा था। वे गोल्फ के भी एक उच्च स्तरीय खिलाड़ी थे। कैसिनो (Casino) जाना उनकी पसंदीदा आदतों में शुमार था और कई बार तो वे पूरी खुमारी (हैंगओवर) में ही सीधे मैदान पर बल्लेबाजी करने पहुंच जाया करते थे।

भारतीय अभिनेत्री अंजू महेंद्रू के साथ उनका इश्क और सगाई उस दौर में काफी चर्चा में रही थी, लेकिन उन्होंने शादी एक ऑस्ट्रेलियाई महिला से की, जिनसे उनके तीन बच्चे (दो बेटे और एक बेटी) हुए।
साल 1990 में उनका तलाक हो गया और वे हमेशा के लिए अपने वतन बारबाडोस आकर बस गए। साल 1975 में उन्हें ‘सर’ (Knight) की उपाधि से सम्मानित किया गया, वहीं बारबाडोस की सरकार ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा।
जिस प्रकार एक शुद्ध बल्लेबाज के रूप में सर डॉन ब्रैडमैन की कोई तुलना नहीं की जा सकती, ठीक उसी प्रकार एक संपूर्ण ऑलराउंडर के रूप में सर गारफील्ड सोबर्स की बराबरी कर पाना नामुमकिन है। क्रिकेट जगत में उनका स्थान हमेशा अमर रहेगा।
