महिला सिपाहियों ने अपना दूध पिलाकर बचाई इस आदिवासी बच्ची की जान

जुबिली न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. ललितपुर में थाना प्रभारी ने गैंगरेप का शिकार 13 साल की बच्ची के साथ खुद भी रेप कर क़ानून व्यवस्था के माथे पर जो कलंक लगाया है उसकी वजह से लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठ रहा है लेकिन हर पुलिसकर्मी इस तरह की राक्षसी प्रवृत्ति का नहीं होता है. राजस्थान के कोटा इलाके बारां जिले की दो महिला सिपाहियों ने इंसानियत की जो मिसाल पेश की है वैसी दूसरी मिसाल ढूंढ पाना कम से कम पुलिस विभाग में तो आसान नहीं होगा.

बारां के सारथल इलाके में सड़क पर नशे में धुत्त पड़े एक व्यक्ति के पास भूख प्यास से निढाल पड़ी ढाई महीने की बच्ची को देखकर पुलिसकर्मी द्रवित हो गए. दो महिला सिपाही पूजा और मुकलेश ने तुरंत उस बच्ची को ज़मीन से उठाया और बारी-बारी से उसे अपना दूध पिलाकर उस मासूम का पेट भरा और उसकी जान बचाई. इन दोनों महिला सिपाहियों ने उस अनजान बच्ची की तब तक देखरेख की जब तक कि उसकी माँ थाने नहीं पहुँच गईं.

जानकारी के अनुसार पुलिस को सूचना मिली कि सारथल इलाके में बेहोश पड़े एक शख्स के साथ एक मासूम बच्ची भी है जो काफी खराब हालत में है. पुलिस मौके पर पहुंची तो बेहोश पड़ा व्यक्ति नशे में धुत्त था. उसके पास मौजूद ढाई महीने की मासूम आदिवासी बच्ची भूख से निढाल थी. भीषण गर्मी में मासूम बच्ची की ऐसी हालत देखकर महिला सिपाही काफी द्रवित हो गईं. महिला सिपाही मुकलेश और पूजा ने बच्ची को ज़मीन से उठा लिया और दोनों ने बारी-बारी से बच्ची को अपना दूध पिलाकर उसका पेट भरा. इन दोनों सिपाहियों के बच्चे बहुत छोटे हैं.

यह मामला बुधवार 4 मई की दोपहर का है. राधेश्याम काथोडी नाम का शख्स अपनी ढाई महीने की बच्ची को गोद में लेकर पैदल ही 15 किलोमीटर दूर जा रहा था. उसने रास्ते में शराब पी और नशे की वजह से जंगल में गिरकर बेसुध हो गया. पुलिस को जानकारी मिली तो पुलिस घटनास्थल से दोनों को उठाकर थाने लाई. जहाँ दोनों महिला सिपाहियों ने उस बच्ची की ज़िन्दगी बचाई.

पुलिस ने बच्ची की माँ को सूचना भिजवाई. जब तक वह थाने नहीं पहुँच गई तब तक दोनों महिला सिपाहियों ने उस बच्ची का पूरा ध्यान रखा और माँ के आने पर उसे सुरक्षित सौंप दिया. यह एक ऐसी मिसाल है जो पुलिस विभाग का सर ऊंचा करने के लिए काफी है.

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