कांग्रेस का ‘अहिंदा फॉर्मूला’ क्या है, जिससे कर्नाटक में सिद्धारमैया की कुर्सी मजबूत?

जुबिली स्पेशल डेस्क

कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग जागरूकता मंच ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थन में 25 जनवरी 2026 को मैसूरु में एक बड़े अहिंदा सम्मेलन के आयोजन का फैसला किया है।

इस सम्मेलन को मुख्यमंत्री के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। बुधवार को मैसूरु में हुई अहिंदा नेताओं की प्रारंभिक बैठक में कार्यक्रम की तिथि और स्थान को अंतिम रूप दिया गया। सम्मेलन में 25 से 30 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में मंच के अध्यक्ष के. शिवराम, समन्वयक योगेश, वरिष्ठ नेता नंजुंडास्वामी सहित विभिन्न अहिंदा समूहों के 25 से अधिक नेता मौजूद रहे।

शिवराम ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया स्वयं इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, लेकिन लेखकों, प्रगतिशील विचारकों और कांग्रेस के चुनिंदा नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन इस मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए, क्योंकि वे राज्य में अहिंदा वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख नेता हैं। शिवराम के मुताबिक, अहिंदा में ‘अ’ अल्पसंख्यकों, ‘हिंद’ अन्य पिछड़ा वर्ग और ‘द’ अनुसूचित जाति व जनजाति का प्रतीक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया तो कांग्रेस पार्टी को अहिंदा वोट बैंक का नुकसान हो सकता है। यह आयोजन पार्टी के लिए सिद्धारमैया के राजनीतिक महत्व को दर्शाएगा।

डीके शिवकुमार बोले-मैं पार्टी कार्यकर्ता ही रहूंगा

उधर, अहिंदा सम्मेलन के जरिए शक्ति प्रदर्शन की योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सभी को शुभकामनाएं दीं। दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनके लिए किसी भी पद से ज्यादा अहम पार्टी कार्यकर्ता होना है।

शिवकुमार ने कहा, “मैं 1980 से कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं और भविष्य में भी कार्यकर्ता ही बना रहूंगा।” जब उनसे पूछा गया कि क्या वे पांच साल तक उपमुख्यमंत्री बने रहने से संतुष्ट होंगे, तो उन्होंने दोहराया कि पार्टी कार्यकर्ता का पद ही उनके लिए एकमात्र स्थायी पद है।

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