Sunday - 15 December 2019 - 1:09 AM

महाभियोग मामले की सुनवाई में भाग नहीं लेगा व्हाइट हाउस

न्यूज डेस्क

4 दिसंबर से अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग के कानूनी आयामों पर विचार होना है। इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वकील ने कहा है कि व्हाइट हाउस अमेरिकी संसद की इस सुनवाई में भाग नहीं लेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस की वकील पैट सिपोलोन ने संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा में न्यायिक समिति के डेमोक्रेटिक अध्यक्ष जेरी नैडलर को एक पत्र लिखा है। इसमें लिखा गया है, ‘अभी तक गवाहों के नाम नहीं बताए गए है। यह भी साफ नहीं है कि क्या न्यायिक समिति अतिरिक्त सुनवाई के जरिए निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन करेगी। ऐसे में हमसे इस सुनवाई में हिस्सा लेने की उम्मीद नहीं की जा सकती।’

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गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में अपने संभावित प्रतिद्वंदी जो बिडेन की छवि खराब करने के लिए यूक्रेन से गैरकानूनी रूप से मदद मांगी।

4 दिसंबर को सदन की न्यायिक समिति इस पर सुनवाई शुरू करेगी कि क्या जांच में शामिल किए गए सबूत ‘राजद्रोह, घूस या अन्य उच्च अपराधों और खराब आचरण’  के आधार पर संवैधानिक रूप से महाभियोग चलाने के मानकों को पूरा करते हैं। मालूम हो कि अमेरिका के इतिहास में अभी तक किसी भी राष्ट्रपति को महाभियोग के जरिये नहीं हटाया गया है।

कैसे बर्खास्त हो सकते हैं ट्रंप?

पहले छह हाउस कमेटियां महाभियोग संबंधी आरोपों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ जांच करने के बाद अपनी राय न्यायिक कमेटी को भेजेंगी। ये राय महाभियोग चलाए जाने को लेकर पर्याप्त स्वीकार्य हुई तो महाभियोग के एक या ज़्यादा आर्टिकलों के तहत सदन में वोटिंग होगी।

सदन में अगर बहुमत ने महाभियोग के पक्ष में वोट दिया तो महाभियोग चलेगा। इसके बाद मामला सीनेट में पहुंचेगा, जहां ट्रंप के खिलाफ ट्रायल चलेगा। ट्रायल के बाद सीनेट में ट्रंप को दोषी ठहराने के लिए वोटिंग होगी। अगर दो तिहाई बहुमत दोषी ठहराएगा तो ट्रंप बर्खास्त कर दिए जाएंगे।

क्या है सदनों का गणित

सीनेट में ट्रंप के समर्थकों यानी रिपब्लिकन सदस्यों का दबदबा यानी बहुमत है इसलिए यहां महाभियोग के पक्ष में वोटिंग होना बेहद मुश्किल है। इसके लिए ट्रंप पर लगाए गए आरोपों का बेहद संगीन साबित होना बहुत जरूरी होगा। दूसरी तरफ निचले सदन में डेमोक्रेट्स का दबदबा है इसलिए माना जा सकता है कि इस सदन से महाभियोग का केस आगे बढ़कर सीनेट तक पहुंच सकता है।

अब तक कितने राष्ट्रपतियों पर चला है महाभियोग

अमेरिका के इतिहास में अब तक केवल दो राष्ट्रपतियों पर महाभियोग की कार्रवाई हुई है। वर्ष 1868 में एंड्रयू जॉनसन के खिलाफ महाभियोग चला था जब एक सरकारी अधिकारी को गैर कानूनी तरीके से बर्खास्त करने का आरोप उन पर लगा था। इसके 130 साल बाद वर्ष 1998 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग चला था।

बिल क्लिंटन का मामला बहुत सुर्खियों में रहा था। बिल क्लिंटन के खिलाफ मोनिका लेवेंस्की नामक महिला ने सेक्सुअल हैरसमेंट के आरोप लगाए थे। हालांकि दोनों ही मामलों में दोनों राष्ट्रपतियों को बख्श दिया गया और दोनों ने कार्यकाल पूरा किया था। इसके अलावा, 1974 में वॉटरगेट स्कैंडल के चलते रिचर्ड निक्सन के खिलाफ भी महाभियोग चल सकता था लेकिन उससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

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