Saturday - 8 May 2021 - 12:59 AM

नीतीश कुमार की मुश्किलें बढ़ाएगा बीजेपी का यह मित्र

प्रमुख संवाददाता

नई दिल्ली. बिहार में नीतीश कुमार की राह उतनी आसान नहीं है जितनी वह समझ रहे थे. पिछला चुनाव जेडीयू ने लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन कर लड़ा था. शरद यादव भी उनके साथ थे. शरद यादव को उन्होंने लालू से नाता तोड़कर बीजेपी से जोड़ने के साथ ही खत्म कर लिया था. अब राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी उनका साथ छोड़ गई है. ऐसे में नीतीश कुमार की रातों की नींद हराम हो गई है.

नीतीश कुमार को इस चुनाव में सीधे तौर पर उन्हीं लालू प्रसाद यादव की पार्टी से टक्कर लेनी है जिसने पिछली बार उनकी ताजपोशी की थी. नीतीश कुमार की जेडीयू एनडीए का हिस्सा है. रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी केन्द्र में एनडीए का हिस्सा है इस नाते नीतीश को भरोसा था कि एलजेपी उनके साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. इसी वजह से नीतीश ने एलजेपी को 24 से 27 सीट पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव किया.

रामविलास पासवान के बेटे और एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने 24 से 27 सीट को अपमानजनक प्रस्ताव बताते हुए बिहार में अपने बल पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार ने दिन भर यह कोशिश की कि चिराग के साथ उनकी बात हो जाए और कुछ सीटें बढ़ाकर समझौता हो जाए लेकिन चिराग ने यह कहकर सारी संभावनाओं पर विराम लगा दिया कि उन्हें नीतीश का नेतृत्व स्वीकार नहीं है. उन्होंने कहा कि वह बिहार में इस सरकार में हुए भ्रष्टाचार के मामले उठाएंगे.

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आज रविवार को लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय बोर्ड की दिल्ली में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि एलजेपी का बीजेपी से साथ बना रहेगा लेकिन बिहार में वह जेडीयू गठबंधन के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी. एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में कहा गया कि चुनाव के बाद एलजेपी के विधायक प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन करेंगे. बिहार में एलजेपी बीजेपी के साथ मिलकर सरकार भी बना सकती है.

एलजेपी बिहार में 143 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने जा रही है. एलजेपी ने जो सीटें चुनाव लड़ने के लिए तय की हैं उसमें से 20 सीटें ऐसी हैं जिन पर बीजेपी से टक्कर हो सकती है. इन 20 सीटों के बारे में बीजेपी से फ्रेंडली फाईट का फैसला भी लिया जा सकता है.

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रतीन्द्र नाथ से इस सम्बन्ध में बात हुई तो उन्होंने कहा कि एलजेपी और एनडीए से बिहार में रिश्ता टूटने से जेडीयू को नुक्सान होगा. चिराग पासवान की सक्रियता से जेडीयू काफी डैमेज होगी, लेकिन सरकार एक बार फिर एनडीए की बन सकती है. रतीन्द्र नाथ को लगता है कि चिराग पासवान के साथ मिलकर खुद बीजेपी ने ऐसी फिक्सिंग की है कि वह जेडीयू से अलग हटकर चुनाव लड़ें.

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