Monday - 12 April 2021 - 1:01 AM

मोदी के आने के बाद से भारत में अधिकारों और आजादी में आई कमी

जुबिली न्यूज डेस्क

भारत में राजनीतिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता में कमी आई है। भारत में आम आदमी के अधिकारों का हनन हो रहा है और उनके मूलभूत स्वतंत्रताओं को छीना जा रहा है।

यह बातें फ्रीडम हाउस ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कही गई है। फ्रीडम हाउस ने आजादी के सूचकांक में भारत को ‘आजाद’ से गिरा कर ‘आंशिक रूप से आजाद’ स्तर पर ला दिया है।

‘फ्रीडम हाउस’ एक अमेरिकी शोध संस्थान है। यह हर साल ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड’ रिपोर्ट निकालता है, जिसमें दुनिया के अलग-अलग देशों में राजनीतिक आजादी और नागरिक अधिकारों के स्तर की समीक्षा की जाती है।

फिलहाल इस संस्था ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत में अधिकारों और आजादी में आई कमी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्तकी है।

भारत में ऐसे हालात के लिए संस्था ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार को जिम्मेदार माना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही देश में राजनीतिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता में कमी आई है।

संस्था का यह भी आंकलन है कि भारत में मानवाधिकार संगठनों पर दबाव बढ़ा है, विद्वानों और पत्रकारों को डराने का चलन बढ़ा है और विशेष रूप से मुसलमानों को निशाना बना कर कई हमले किए गए हैं।

मोदी सरकार में बढ़ा राजद्रोह लगाने का चलन

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इस पतन की रफ्तार 2019 में नरेन्द्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद और तेज हो गई।

यह संस्था देशों को 25 मानकों पर अंक देती है, जिनमें आजादी और अधिकारों से जुड़े कई सवाल शामिल हैं। आम लोगों द्वारा स्वतंत्रता से और बिना किसी डर के अपने विचार व्यक्त करने के सवाल पर में हाल के वर्षों में कई लोगों के खिलाफ राजद्रोह जैसे आरोप लगाने के चलन में आई बढ़ोतरी की वजह से भारत के अंक गिर गए हैं।

भारत का अंक गिरने की कई और वजहें हैं। पहली गैर सरकारी संगठनों को काम करने की स्वतंत्रता के सवाल पर भी विदेश से पैसे लेने के कानून में बदलाव और एमनेस्टी के दफ्तर भारत में बंद हो जाने की वजह से रिपोर्ट में भारत के अंक गिर गए हैं।

दूसरी अदालतों के स्वतंत्र होने के सवाल पर भी भारत के अंक गिरे हैं। देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को राज्य सभा का सदस्य बनाना, उच्चतम न्यायालय द्वारा सरकार के पक्ष में कई फैसले देने का पैटर्न और केंद्र सरकार के खिलाफ फैसला देने वाले एक जज के ट्रांसफर जैसी घटनाओं को गिनाया गया है।

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तीसरी वजह है -नागरिकों को एक जगह से दूसरी जगह जाने की स्वतंत्रता के सवाल पर लॉकडाउन के दौरान हुए प्रवासी श्रमिक संकट और पुलिस और ‘विजिलांते’ लोगों द्वारा हिंसक और भेद-भावपूर्ण बर्ताव की वजह से देश के अंक गिर गए हैं।

तानाशाही की तरफ जा रही सरकार

रिपोर्ट में भारत में कोरोना के शुरुआती दिनों में जब मुसलमानों को संक्रमण फैलाने का जिम्मेदार ठहराया गया था, इसका भी जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्ता पर काबिज ‘हिंदू राष्ट्रवादी ताकतों’ ने मुसलमानों को बलि का बकरा बनाए जाने को बढ़ावा दिया। उन्हें अनुपातहीन रूप से कोरोना वायरस फैलाने के लिए जिम्मेदार बताया गया जिसकी वजह से उन पर भीड़ द्वारा हमले हुए।

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कई उदाहरणों को देकर रिपोर्ट में कहा गया है कि “लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रबल समर्थक और चीन जैसे तानाशाही देशों के खिलाफ खड़ा होने वाला देश बनाने की जगह, मोदी और उनकी पार्टी भारत को तानाशाशी की तरफ ले जा रहे हैं।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह और ज्यादा चिंताजनक इसलिए हैं क्योंकि भारत के “आंशिक रूप से स्वतंत्र” श्रेणी में आने के बाद अब दुनिया की 20 प्रतिशत से भी कम आबादी स्वतंत्रत देशों में बची है। यह 1995 के बाद अभी तक का सबसे कम अनुपात है।

हालांकि इस रिपोर्ट पर भारत सरकार की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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