Wednesday - 15 July 2020 - 2:31 PM

कोरोना की मार से नहीं बच पाया फलों का राजा ‘आम’

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ। फलों का राजा आम को भी कोरोना ने अपना शिकार बना लिया है। गर्मी के मौसम में सबके प्लेट में सजने वाले आम की बाजारी सेहत बहुत खराब है। पहले आंधी- बारिश फिर ओले से सामना हुआ जब बचे हुए आम की सप्लाई होनी थी तब लॉकडाउन चल रहा था। जुबिली पोस्ट ने पहले ही बताया था इस बार आम पर कोरोना का साया रहेगा, जो अब दिखने लगा है।

इस बार आम का सीजन आम कारोबारियों को चोट पहुंचा रहा है। सीजन की शुरुआत ही सुस्त होने से लखनऊ के मलिहाबाद के कारोबारी काफी परेशान है। पहले जून के महीने में आम से मलिहाबाद फल मंडी महका करती थी, लेकिन अब वहां मायूसी के बादल छाये है।

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मलिहाबाद फल मंडी के करोबारियों के मुताबिक रोजाना 50% आर्डर कैंसिल हो रहे हैं। दो दिन में 140 ट्रकों की बुकिंग के साथ 50% आर्डर रद्द होने की बात सामने आयी है।

आम उत्पादकों की माने तो सबसे ज्यादा आम दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, पंजाब जाता रहा है। इन राज्यों से बड़ी संख्या में पलायन हुआ है। इनमें ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो फुटकर आम बेचते थे। समस्या है कि इनके चले जाने से अब फुटकर बाजार में आम बेचेगा कौन?

इसके अलावा राज्यों में शासन- प्रशासन की सख्ती, रही कसर कोरोना संक्रमण के डर ने पूरी कर दी। उत्पादकों की माने तो अभी मंडी लगी है, ऐसे में इतना सन्नाटा पहली बार देखने को मिल रहा है। लग रहा कि सीजन खत्म होने जा रहा है।

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मलिहाबाद फल मंडी के अध्यक्ष नसीम बेग के मुताबिक व्यापारी तो आए, लेकिन कई राज्यों की सीमा सील होने की खबर, लॉकडाउन फिर से लागू होने की आशंका में उन्होंने माल ले जाने से मना कर दिया। दो दिन पहले मेरा एक ट्रक उत्तराखंड से लौट आया। बीते दिनों कई ट्रक का ऑर्डर कैंसिल हुआ।

रात में सौदा होता है, सुबह लोग फोन का कैंसिल करवा देते है, नुकसान तो एक तरफ फसल के दाम निकलना मुश्किल हो रहा है। घाटे से बचने को 25 रुपये में बिकने वाले आम को 17-18 रुपये में बेच रहे हैं।

संडीला के आम बागान मयंक कहते हैं कि इस बार बाग खरीदने वाले ही कम हैं। बागान मालिक बाग बेचकर तनाव मुक्त हो जाता है। ऐसे में कारोबारी ही नहीं आए तो मालिक औने- पौने दाम पर बाग बेच गए।

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ढुलाई के लिए आम उत्पादकों को ट्रक उपलब्ध कराने वाले ट्रांसपोर्टर नदीम के अनुसार शुक्रवार को मुंबई के लिए सिर्फ चार ट्रक गए हैं। पिछले साल एक दिन में 50 रवाना हुए थे। दिल्ली के लिए 70-80 गाड़ियों की जगह एक दिन में 10 गाड़ियां ही बमुश्किल निकल रही हैं। पंजाब के लिए 25-30 की जगह चार ट्रक गए हैं। मंडी में ट्रकों की संख्या 92% तक घटी है।

आम व्यवसाय से जुड़े सचिन अवस्थी का कहना है कोरोना के कारण इस समय पूरा अमेरिकी, यूरोपीय बाजार ध्वस्त हुआ पड़ा है। मध्य-पूर्व के बाजारों के भी खुलने की नजदीक में कोई उम्मीद नहीं दिखाई पड़ रही है। इसका भारी खामियाजा भारत के आम व्यापारियों को भुगतना पड़ा है। जल्द आम की मांग बाजार में नहीं बढ़ी तो आम उत्पादक बर्बादी के रास्ते पर आ जाएंगे।

फुटकर बाजार में भी सुस्ती

लखनऊ की फुटकर बाजार की बात करे तो यहां आम 60 से 90 रुपए किलो तक बिक रहा है, लेकिन खरीददार कम है, वजह फल मंडी से महंगा ट्रांसपोर्ट और पीक सीजन की वजह से आम की कीमतें ज्यादा है।

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