Wednesday - 1 February 2023 - 11:40 PM

महाराष्ट्र में ऐसे तो फिर नहीं बनेगी बात

न्यूज डेस्क

मुख्यमंत्री पद को लेकर शिवसेना और बीजेपी में रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही। शिवसेना लगातार बीजेपी पर कभी दुष्यंत चौटाला को लेकर तो कभी आर्थिक मंदी को लेकर तंज कस रही है तो वहीं आज मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने साफ-साफ कह दिए कि वो अगले पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे।अब जब बीजेपी झुकने को तैयार नहीं है तो सवाल उठता है कि शिवसेना क्या करेगी?

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना में सियासी कलह चरम पर पहुंच गई है। शिवसेना के वरिष्ठï नेता संजय राउत ने मंगलवार को सुबह दुष्यंत चौटाला के सहारे बीजेपी पर तंज कसा तो कुछ ही देर बाद बीजेपी ने दो टूक कह दिया कि मुख्यमंत्री का पद शेयर नहीं किया जाएगा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा कि हमारे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इस बात की पुष्टि की है कि शिवसेना के साथ सीएम पद को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि अब तक कोई भी फॉर्मूला तय नहीं हुआ है।

फडणवीस ने कहा, ‘मैं आश्वस्त कर सकता हूं कि बीजेपी की अगुआई वाली सरकार ही बनेगी।’ उन्होंने कहा कि मैं और पांच साल के लिए मुख्यमंत्री रहूंगा। चुनाव से पहले जब गठबंधन को अंतिम रूप दिया गया था तब शिवसेना से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद का वादा नहीं किया गया था।

सीएम देवेन्द्र फडणवीस के बयान से पहले शिवसेना ने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए कहा था, ‘यहां कोई दुष्यंत नहीं है, जिसके पिता जेल में हैं। यहां हम हैं जो धर्म और सत्य की राजनीति करते हैं।’ दरअसल, शिवसेना 50:50 फॉर्मूले पर अड़ी हुई है।

गौरतलब है कि शिवसेना लगातार भाजपा पर तंज कसते हुए दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं निर्दलीयों को लुभाने की कोशिशें की जा रही हैं। कल महाराष्ट्र बीजेपी ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई है, जिसमें विधानसभा में पार्टी का नेता चुना जाएगा। ऐसी चर्चा है कि अपने सहयोगी पर दबाव बनाने के लिए कल ही बीजेपी सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकती है।

उधर, शिवसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ सरकार बनाने में आ रही अड़चनों को दूर करने पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बात कर सकते हैं। बताते चले कि 8 नवंबर तक नई सरकार का गठन होना है। माना जा रहा है कि शिवसेना से बात न बनने पर बीजेपी 2014 की तर्ज पर अल्पमत की ही सरकार बना सकती है, जिसके गठन के बाद सदन में बहुमत परीक्षण किया जाएगा। बीजेपी को उम्मीद है कि पिछली बार की तरह इस बार भी एनसीपी उसे समर्थन दे सकती है।

दरअसल शिवसेना मुख्यमंत्री के पद पर दावा कर रही है। उसका कहना है कि प्रत्येक पार्टी को ढाई वर्ष के लिए यह पद मिलना चाहिए। वहीं बीजेपी को शिवसेना के इस प्रपोजल पर आपत्ति है। हालांकि, ऐसे संकेत हैं कि बीजेपी उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को देने के लिए तैयार है।

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