Share Market Crash: लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, जानिए गिरावट की 5 बड़ी वजहें

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार की कमजोरी के बाद गुरुवार को भी बाजार लाल निशान में खुला। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते निवेशकों का भरोसा डगमगाता नजर आया।

सुबह कारोबार की शुरुआत में निफ्टी 50 123 अंकों की गिरावट के साथ 23,283 पर खुला, जबकि सेंसेक्स करीब 450 अंक टूटकर 73,900-74,000 के दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया।

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

गुरुवार सुबह अधिकांश एशियाई शेयर बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक निवेशकों की सतर्कता और युद्ध की आशंकाओं ने क्षेत्रीय बाजारों पर दबाव बनाया, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

बुधवार को अमेरिकी बाजार भी दबाव में रहे। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

  • डाऊ जोन्स इंडेक्स 620.72 अंक यानी 1.21% गिरकर बंद हुआ।
  • S&P 500 इंडेक्स 56.10 अंक फिसला।
  • नैस्डेक कम्पोजिट 240 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच सीधे टकराव की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे वैश्विक इक्विटी बाजारों में बिकवाली तेज हुई।

कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी दर्ज की गई है।

  • ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 97.07 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
  • WTI क्रूड 95.43 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है।

गौरतलब है कि 29 मई को ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पर था। कुछ ही दिनों में आई इस तेजी ने महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) 99.45 के आसपास कारोबार कर रहा है।

वहीं भारतीय रुपया 3 जून को डॉलर के मुकाबले 0.45% कमजोर होकर 95.71 के स्तर पर बंद हुआ था। रुपये में कमजोरी विदेशी निवेश प्रवाह और आयात लागत दोनों पर असर डाल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम, क्रूड ऑयल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी।

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