Thursday - 4 June 2020 - 9:33 AM

आयुष्मान योजना में घोटाले पर पर्दा डालने की तैयारी

जुबिली न्यूज़ डेस्क

जुबली पोस्ट ने दिनांक 20 सितम्बर 2019 के अपने पिछले अंक में आयुष्मान योजना के पात्र लाभार्थियों के प्लास्टिक कार्डों के भुगतान में बड़ी धांधली का मामला साक्ष्य सहित उठाया था। बताया था कि किस प्रकार मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने फार्म अलंकृत लिमिटेड को व्यक्तिगत फायदा पहुंचाने के लिए नियम विरूद्ध भुगतान कर दिया था और आगे रनिंग के नाम पर और एडवांस भुगतान करने की तैयारी की जा रही थी, फिर भी वित्त नियंत्रक की आपत्ति के बाद भी कार्य पालक अधिकारी ने भुगतान कर दिया।

26 सितंबर 2019 के अंक में जुबली पोस्ट ने बताया कि कार्डों में क्रिटिकल एरर होने और अधिकृत संस्था सीएमओ/डीएम से रिसीविंग ना होने के बावजूद आरएफपी/एमओयू की शर्तो को ओवर रूल करते हुए एक करोड़ रूपये का भुगतान फर्म को और कर दिया। क्रिटिकल एरर के बावजूद पेनाल्टी का भी प्रावधान नहीं किया गया।

यह भी पढें : जिस आयुष्मान योजना की सफलता का सीएम मनाएंगे जश्न, वहाँ तो हो रही है बड़ी धांधली

यह भी पढें : आयुष्मान योजना के कार्ड के भुगतान में किसने कर दी धांधली ?

जुबली पोस्ट ने अपनी तहकीकात में पाया है कि 30 लाख प्लास्टिक कार्ड वितरण का अनुबंध फर्म से किया गया था जिसमें से शहरी क्षेत्रों में क्रिटिकल एरर के कारण भारी संख्या में कार्ड प्राइवेट कोरियर( मधुर कोरियर) से कंपनी ने वापस मंगा लिए थे। जानकारी के अनुसार अब तक 789590 कार्ड, फर्म के पास लंबित थे जिन्होंने अब तक उन्हें क्रिटिकल एरर को दुरुस्त करके जिलों को वापस नहीं किया गया है। इस प्रकार 3088 0193 रुपए मूल्य के ही कार्ड छपे/वितरित किए गए। फर्म को कुल 15440 097 रूपये (लगभग एक करोड़, 155 लाख) का ही भुगतान अग्रिम होना चाहिए था, लेकिन किया गया दो करोड़, 90 लाख। एक करोड़, 35 लाख का अधिक और अनियमित भुगतान फर्म को कर दिया गया।

अब घोटाले पर पर्दा डालने की तैयारी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जुबली पोस्ट द्वारा इस मामले को उठाने के बाद शासन ने इसको गंभीरता से लिया और इसके लिए आयुष्मान योजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से जवाब तलब किया गया है। अब यह कोशिश की जा रही है कि किस तरह से इस घोटाले को सही साबित किया जा सके।

एक करोड़, 35 लाख एडवांस/ रनिंग के अनियमित अधिक भुगतान को सही दर्शाने के लिए फर्म से एक करोड़, 35 लाख की बी जी (बैंक गारंटी) लिए जाने की चर्चा है ताकि जो अग्रिम भुगतान अनियमित रूप से अधिक कर दिया गया है उसे फर्म से बैंक गारंटी ले कर शासन को बताया सके कि इस एक करोड़, 35 लाख का समायोजन कर लिया गया है।

नहीं दिये पूरे कार्ड फिर भी नहीं की कारवाई

अनुबंध के अनुसार कार्ड पूरी संख्या में जनपदों में भेजे ही नहीं गए हैं, जो कार्ड रिप्रिन्ट के लिए फर्म को जनपदों से वापस किये गये थे, उन्हें भी अब तक जनपदों को वापस नहीं किया गया है।

जुबली पोस्ट द्वारा जुटाई गयी जानकारी के अनुसार औरैय्या, फतेहपुर सहित कई जनपद इसके उदाहरण हैं। क्रिटिकल एरर के बावजूद पेनाल्टी की भी कटौती नहीं की गई और न ही फर्म के विरूद्ध कोई कारवाई ही की गयी।साचीज और फर्म अलंकृत लिमिटेड के बीच हुए अनुबंध के अनुसार दस लाख रूपये की सिक्योरिटी मनी ली जानी थी जिसकी वैलिडिटी तीन माह की थी और कार्ड के कान्ट्रैक्ट की समय सीमा दो माह की थी। अवधि समाप्त होने के बाद अब बैंक गारंटी लिये जाने का कोई औचित्य नहीं है। आयुष्मान भारत किसी भी प्राइवेट फॉर्म को अग्रिम धनराशि दे कर फिर लगभग डेढ़ साल बाद वापस ले ऐसा कोई नियम नहीं है। नियमानुसार अग्रिम भुगतान की वापसी प्रचलित बैंक ब्याज दर से अधिक दर पर ब्याज पर ही लिए जाने का प्रावधान है जबकि बैंक गारंटी में ब्याज जोड़कर नहीं लिया जा रहा है।

इन सबके बावजूद तमाम आपत्तियों को दरकिनार करते हुए कार्यपालक अधिकारी और उनकी टीम ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना का सही ढंग से मानिटर क्यों नहीं किया और फर्म को अधिक भुगतान भी अनुबंध के विपरीत कर दिया।

अब एक करोड़, 35 लाख के अधिक भुगतान को सही ठहराने के लिए फार्म से बैंक गारंटी लिया जा रहा है जबकि 50 प्रतिशत से अधिक अग्रिम भुगतान अनियमित ही है। देखना यह है कि बैंक गारंटी और नियमित अधिक भुगतान को किस प्रकार सही ठहराया जाता है।

यह भी पढ़ें : Yogi सरकार ऑड-ईवन को UP में लागू करने जा रही है !

यह भी पढ़ें : इन 4 वजह से महाराष्ट्र सरकार का नहीं हो पा रहा गठन

English

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com