Wednesday - 15 July 2020 - 1:13 PM

क्या बाबा रामदेव से नाराज हैं पीएम मोदी ?

जुबली न्यूज़ डेस्क 

बाबा रामदेव ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस करके पतंजलि आयुर्वेद द्वारा कोरोना वायरस के इलाज के लिए बनाई गई ‘दिव्‍य कोरोनिल टैबलेट’ पर हुए विवाद को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि ड्रग माफियाओं और मल्टीनेशनल कंपनियों ने दवा का दुष्प्रचार किया। वे अपने फायदों के लिए योग, स्वदेशी और भारतीयता के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग जरूर खुश हो रहे होंगे कि आयुष मंत्रालय ने कहा कि कोविड मैनेजमेंट के लिए पतंजलि ने जो काम किया उसको हम उपयुक्त कह रहे हैं। इसमें मैनेजमेंट शब्द का इस्तेमाल किया गया,ट्रीटमेंट का नहीं। शब्दों के मायाजाल में हम आयुर्वेद का सत्य न तो दबने देंगे, न ही मिटने देंगे।

इस दौरान बाबा रामदेव अपने खिलाफ की गई कार्रवाई से नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि, ऐसा लगता है कि हिन्दुस्तान के अंदर योग आयुर्वेद का काम करना एक गुनाह हो और सैकड़ों जगह एफआईआर दर्ज हो गईं। जैसे किसी देशद्रोही और आतंकवादी के खिलाफ दर्ज होती हैं।

पतंजलि की दवा के खिलाफ जितनी तेजी से आयुष मंत्रालय ने एक्शन लिया और अब जिस तरह रामदेव ने आज बयान दिया उसके बाद एक बात स्पष्ट हो जाती है कि केंद्र की बीजेपी सरकार और बाबा रामदेव के बीच कुछ तो तनातनी बनी हुई है।

बता दें कि रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद ने 23 जून को कोरोना का इलाज ढूंढने का दावा करते हुए कोरोनिल दवा लॉन्च की थी। इसके 5 घंटे बाद ही केंद्र ने कहा कि पतंजलि के इस दावे के फैक्ट और वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी नहीं है। केंद्र ने कहा कि पतंजलि इस दवा की जानकारी दे और हमारी जांच पूरी होने तक इसका प्रमोशन और विज्ञापन ना करे।

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वहीं इस विवाद के शुरू होने के साथ ही ऐसी ख़बरें भी आईं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले को लेकर बाबा रामदेव से नाराज हैं। बताया गया कि, आयुष मंत्रालय ने इसी वजह से आनन-फानन में कार्रवाई कर डाली। इतना ही नहीं उत्तराखंड सरकार द्वारा बाबा की दवा पर आपत्ति उठाने के बाद दिल्ली व राजस्थान में उनके खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

दरअसल इसके पीछे की वजह वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र सिंह बताते हैं, उनका कहना है कि, कोरोना के लिए आयुर्वेदिक दवा पर प्रधानमंत्री ने खास दिलचस्पी दिखाई थी। उनका कहना था कि आयुर्वेद पर एक ऐसी सर्वमान्य दवा बनाएं जो पूरे विश्व में कारगर साबित हो। इसके लिए पीएम ने मार्च में विशेषज्ञों के साथ वेबीनार की थी। खास बात यह कि इस बैठक में बाबा रामदेव को नहीं बुलाया गया था। आयुष मंत्री यशो श्रीपद नायक भी दवा के लिए मजबूत प्रोटोकॉल बना दिया था ताकि कहीं कोई चूक न होने पाए ।

अभी यह कवायद जारी ही थी कि बाबा ने करोना की दवा लांच कर दी। जिस पर न केवल वैज्ञानिकों ने बल्कि उन आयुर्दिवे क कंपनियों ने भी आपत्ति जताई जो यह दवा बनाना चाहती थी मगर सरकार द्वारा जारी वैज्ञानिक शोध एवं क्लीनिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रही थीं। यही वजह है कि बाबा रामदेव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाराज चल रहे हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्‍यपाल सिंह ने कहा- यह समय विवादों का नहीं

बता दें कि इस विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके सत्‍यपाल सिंह ने ट्वीट किया है।

सत्‍यपाल सिंह ने ट्वीट कर लिखा है, ”यह सही समय है जब आयुर्वेद के आचार्य, आयुर्वेद- प्रेमी, तथा भारत सरकार मिलकर आयुर्वेद को योग की तर्ज पर दुनियां में स्थापित कर सकते हैं। समय बड़े स्वार्थों को समझने का है,विवाद का नहीं, संवाद का है।” अपने इस ट्वीट में सत्‍यपाल सिंह ने आयुष मंत्रालय, पीएमो इंडिया, पीएम नरेंद्र मोदी और योग गुरु बाबा रामदेव को टैग भी किया।

सत्‍यपाल सिंह के इस ट्वीट पर गौर करें तो वह भी किसी विवाद की ओर इशारा कर रहे हैं।

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