Tuesday - 11 August 2020 - 9:18 PM

बहरीन और कैलीफोर्निया के प्रतिभागियों ने भी सीखा ऑनलाइन कथक

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ. ‘संगीत हमारी संस्कृति का आत्म तत्व है. यजुर्वेद में नृत्य को व्यायाम के रूप में लिया गया है. नृत्य के अभ्यास से शरीर के अंग तो खुलते ही हैं, शरीर निरोगी भी रहता है. उम्र बढ़ती है, मानसिक, शारीरिक तनाव दूर होते हैं. आज सारा विश्व भारतीय योग व्यायाम के पीछे भाग रहा है.’

यह उद्गार प्रदेश के संस्कृति मंत्री डॉ. नीलकण्ठ तिवारी ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सभागार में अकादमी के कथक केन्द्र द्वारा संचालित ऑनलाइन कथक कार्यशाला के समापन अवसर पर व्यक्त किये.

इस अवसर पर प्रमुख सचिव संस्कृति जितेन्द्र कुमार, अकादमी की अध्यक्ष डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय और सचिव तरुण राज भी मौजूद थे. अकादमी द्वारा संचालित लोकसंगीत व रूपसज्जा कार्यशाला के बाद अकादमी कथक केन्द्र की पहली जून से चल रही कथक कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों द्वारा सीखे प्रदर्शन को बड़ी टीवी स्क्रीन पर संस्कृति मंत्री के अवलोकन व आशीर्वचन के साथ हो गया. एक महीने की यह निःशुल्क कार्यशाला कोविड-19 के कारण ऑनलाइन थी. इसमें बहरीन और कैलिफोर्निया के प्रतिभागियों समेत चार सौ से ज्यादा प्रतिभागियों ने छह बैचों में प्रशिक्षण प्राप्त किया.

प्रतिभागियों को आशीर्वचन देने के साथ अकादमी द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यशालाओं के संचालन के लिए अकादमी की सराहना करते हुए संस्कृति मंत्री ने कहा कि कोरोना काल में थम सी गयी गतिविधियों के मध्य प्रधानमंत्री और उनके प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी जी ने सार्थक कोशिशें की हैं. इसी के क्रम में हमें अकादमी के माध्यम से कुछ ऐसा करना था कि हम एक सकारात्मक दिशा में बढ़ें. अकादमी ने गीत, संगीत और नृत्य की विधाओं में कई कार्यशालाएं आयोजित की हैं.

ऋग्वेद, भरत मुनि के नाट्यशास्त्र इत्यादि की चर्चा करते हुए संस्कृति मंत्री ने कहा कि आज यहां प्रशिक्षिकाओं द्वारा आप सब को प्रशिक्षण देते देखते हुए बहुत प्रसन्नता हुई. इस सकारात्मक प्रयास में निश्चय ही आप लोगों से छोटे-भाई बहनों या बड़ों ने भी सीखा होगा. सबसे बड़ी बात नृत्य के अभ्यास से श्वास रोकने की क्षमता बढ़ती है, जो कोविड-19 से लड़ने में सहायक मानी गई है. संस्कृति मंत्री ने प्रतिभागियों और प्रशिक्षिकाओं से सवाल भी किए. इससे पहले 25 जून को संस्कृति मंत्री अकादमी की ऑनलाइन संचालित लोकसंगीत कार्यशाला के समापन अवसर पर भी वह प्रतिभागियों से रूबरू हुए थे.

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कार्यशाला में छह बैचों में तीन-तीन बैचों का संचालन करते हुए प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दे रही केन्द्र प्रशिक्षिका श्रुति शर्मा व नीता जोशी ने गुरु वंदना, दुर्गा महिमा की व्याख्या करती स्तुति- नमो देवी अनंत शक्तिरूपणी…., राम भजन- श्रीरामचन्द्र कृपालु भज मन…., ठुमरी- रोको न डगर श्याम…., गजल- आज जाने की जिद न करो…..इत्यादि रचनाओं के संग कृष्ण राधा रास, मधुराष्टकम, सूफी अंदाज, शुद्ध पक्ष में थाट, आमद, गत, तत्कार, परमेलू, टुकड़ा, तिहाइयां, पलटे, गणेश परन, शिव कवित्त, कृष्ण कवित्त आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया.

इस ग्रीष्मकालीन कथक कार्यशाला में आठ वर्ष से 60 वर्ष के बीच हर उम्र के लोगों ने रुचि दिखायी. थियेटर लाइटस, लैपटॉप, कैमरा आदि के संग बेहतर तकनीकी तैयारियों की बदौलत प्रशिक्षण पाने वालों की संख्या तो देश भर से अच्छी मिली ही, कुछ विदेशी प्रतिभागी भी शामिल हुए.

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