Saturday - 22 January 2022 - 1:54 AM

हमारी मानसिकता आज भी गुलाम, उससे बाहर निकलें : कर्नल रवि प्रकाश सिंह

लखनऊ. हमारे देश के इतिहास में मुगलों के शासन का जिक्र भरा पड़ा है। हमारे देश के वीर शासकों और नायकों को खास महत्त्व नहीं दिया गया है। हमारी संस्कृति, परम्परा और ग्रंथों को मिटाने का कार्य किया गया है, जो आज़ादी मिलने के बाद हुआ है। हमारा देश आजाद हुआ और अंग्रेज चले गए, लेकिन हमारी मानसिकता अभी भी अंग्रेज़ियत वाली या गुलाम ही है। हम इससे जितनी जल्दी बाहर निकाल पाएंगे और समझ पाएंगे, उतनी जल्दी हम मानसिक रूप से भी आज़ाद हो जाएंगे। उक्त उद्गार मुख्य वक्ता कर्नल रवि प्रकाश सिंह ने आज़ादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित राष्ट्रहित सर्वोपरि कार्यक्रम के सातवें अंक में व्यक्त किए।

यह कार्यक्रम सरस्वती कुंज, निराला नगर के प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) उच्च तकनीकी (डिजिटल) सूचना संवाद केन्द्र में विद्या भारती, एकल अभियान, इतिहास संकलन समिति अवध, पूर्व सैनिक सेवा परिषद एवं विश्व संवाद केन्द्र अवध के संयुक्त अभियान में चल रहा है।

भारतीय शोध संस्थान के कोषाध्यक्ष डॉ. शिवभूषण त्रिपाठी ने कार्यक्रम की प्रस्ताविकी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आज हम वैचारिक, आर्थिक के साथ-साथ मनोभावों को व्यक्त करने में स्वतंत्र हैं, लेकिन एक ऐसा भी वक्त रहा, जब स्वतंत्रता नहीं थी। मुगलों, अंग्रेजों और आक्रमणकारियों ने हमारे देश पर आक्रमण करके शासन किया।

इसके साथ ही ऋषियों की भूमि भारत देश के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को खत्म करने का कई बार प्रयास भी किया। इसी गौरवशाली इतिहास और परम्परा से अपने देश की युवा पीढ़ी को परिचित कराने और उनके मन-मस्तिष्क में संस्कृति को उतारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के 75वें वर्ष को आज़ादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

मुख्य वक्ता कर्नल रवि प्रकाश सिंह ने कहा कि आज हम आज़ादी का 75वां वर्ष अमृत महोत्सव के रूप में मना रहे हैं, यह इस बात को दर्शाता है कि 75 वर्ष पूर्व हमारा देश गुलामी में जकड़ा था, जिसे आज़ाद कराने के लिए अनेकों क्रांतिवीरों ने लड़ाइयां लड़ी और बलिदान भी हुए।

उन्होंने गांधी   और स्वामी विवेकानंद के बीच हुई वार्ता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यदि हम इस बात को समझ लें कि हम गुलाम क्यों हुए थे तो हम आज़ाद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारी हमें इसलिए गुलाम बना पाये, क्योंकि वह हमारी कमियों को जानते थे। उन्होंने कहा कि हम जिस भी क्षेत्र में कार्य करें, वह राष्ट्र हित में होना चाहिए।

मुख्य अतिथि कीर्ति चक्र व सेना मेडल से सम्मानित मेजर ए.के. सिंह ने कहा कि हम अपनी संस्कृति, अपनी सोच-विचार और अपने संस्कारों को जितना मजबूती से मानेंगे, उतना ही हमारा आत्मसम्मान और मनोबल बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। हम अपने आपको मजबूत रखेंगे तो हमारा देश स्वत: मजबूत हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा देश हमेशा से महान रहा है और आज भी उस तरफ अग्रसर है। खेल, विज्ञान, तकनीकि, शिक्षा सहित हर क्षेत्र में हम अपनी वैश्विक पहचान बना रहे हैं। हमें मजबूती, दृढ़ विश्वास और पूर्ण इच्छाशक्ति से काम करना है, ताकि असफलता हमें छू भी न पाए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य मजबूत है तो छोटी-छोटी बधाएं भी उसे नहीं रोक पाएंगी।

विशिष्ट अतिथि वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, बिहार के कुलपति प्रो. डी.पी. तिवारी जी ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही संकल्पना है कि आज हम स्वतन्त्रता के उन वीरों को याद कर रहे हैं, जिनके बारे में हमें पता तक नहीं है। हमारे देश की परतन्त्रता सिकंदर के आक्रमण से शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि हम सभी चीजों से सम्पन्न होने के बाद भी क्यों बार-बार पराजित होते हैं, यह सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने सामाजिक व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे देश में काम के आधार पर ही वर्ण व्यवस्था बनाई गई थी, जो समय के साथ-साथ जाति व्यवस्था में परिवर्तित हो गई। हमारी सबसे बड़ी कमी थी कि हमने वर्ण व्यवस्था के आधार पर ही सैन्य की शिक्षा दी, जबकि पूरे समाज को ये शिक्षा देनी चाहिए थी।

कार्यक्रम अध्यक्ष अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के सह संगठन मंत्री  संजय श्रीहर्ष जी ने कहा कि अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा आज़ादी का 75 वां वर्ष, बलिदानियों के संघर्ष और उनके बारे में जानने व स्मरण करने का वर्ष है।

हमारा देश हमेशा से मृत्युंजय राष्ट्र रहा है। विश्व में भिन्न-भिन्न प्रकार की संस्कृतियां जन्मीं और समाप्त हो गई, लेकिन हमारे देश की संस्कृति हमेशा से अमर रही है। भारत की संस्कृति सदैव से विश्व के कल्याण की रही है। विश्व कल्याण के इस संकल्प को जब-जब भंग करने के लिए आक्रमणकारी आ, तब-तब वीर अमर बलिदानियों ने उसकी संस्कृति को अक्षुण्य और अमर बनाने के लिए बलिदान दिया।

कार्यक्रम में सैनिक सेवा परिषद की मातृ शक्ति श्रीमती मंजू सिंह जी और डॉ. आस्था खरे ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आए अतिथियों का परिचय ने विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के सह प्रचार प्रमुख  भास्कर दूबे जी ने और आभार इतिहास संकलन समिति के सदस्य डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रचार प्रमुख  सौरभ मिश्रा जी ने किया। इस कार्यक्रम में सरिता जी, कार्यक्रम संयोजक डॉ. मुकेश जी, बीबीडी और बीबीएयू के छात्र-छात्राएं सहित कई लोग मौजूद रहे।

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