Tuesday - 7 July 2020 - 5:51 AM

कोरोना संकट के बीच मोदी सरकार ने नई योजनाओं पर लगाया ब्रेक

न्यूज़ डेस्क 

कोरोना वायरस की वजह से देश में लागू हुए लॉकडाउन से पूरी इकॉनमी को तगड़ा झटका लगा है। कई क्षेत्रों में लंबे समय तक काम बंद रहा, जिसके चलते हजारों करोड़ों का नुकसान हुआ। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों का असर सरकारी योजनाओं पर भी पड़ने लगा है। केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष (2020-21) में कोई भी नई सरकारी योजना की शुरुआत नहीं करने का फैसला लिया है।

वित्त मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों को नई योजनाओं को इस वित्त वर्ष तक नहीं शुरू करने को कहा है। हालांकि, सरकार ने आत्म निर्भर भारत अभियान और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजनाओं पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई है।

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सरकार की ओर से जारी आदेश में साफतौर पर कहा गया है कि विभिन्न मंत्रालय नई योजनाओं की शुरुआत न करें। पहले से ही स्वीकृत नई योजनाओं को 31 मार्च, 2021 या फिर अगले आदेशों तक स्थगित किया जाता है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना या आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत घोषित योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करें।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की ओर से 4 जून को जारी आदेश में कहा गया, ‘कोरोना महामारी के मद्देनजर सार्वजनिक वित्तीय संसाधनों पर अभूतपूर्व मांग है और बदलती प्राथमिकताओं के साथ संसाधनों का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करने की आवश्यकता है।’

इस आदेश में कहा गया, ‘स्थायी वित्त समिति प्रस्तावों (500 करोड़ रुपये से उपर की योजना) सहित वित्तीय वर्ष 2020-21 में पहले से ही स्वीकृत या अनुमोदित नई योजनाओं की शुरुआत एक वर्ष तक निलंबित रहेगी।’

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कोरोना संकट के कारण वित्त मंत्रालय ने यह अहम फैसला लिया है, क्योंकि सरकार के पास राजस्व कम आ रहा है. लेखा महानियंत्रक के पास उपलब्ध रिपोर्ट से पता चलता है कि अप्रैल 2020 के दौरान 27,548 करोड़ रुपये राजस्व मिला, जो बजट अनुमान का 1.2% था। जबकि सरकार ने 3.07 लाख करोड़ खर्च किया, जो बजट अनुमान का 10 फीसदी था।

वित्तीय संकट से जूझने की वजह से सरकार कर्ज भी ज्‍यादा ले रही है। बीते दिनों सरकार ने ऐलान किया था कि वह चालू वित्त वर्ष के लिए अपने बाजार से कर्ज लेने का अनुमान 4.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये करेगी।

वित्त मंत्रालय ने कहा था कि वित्त वर्ष 2020-21 में अनुमानित कर्ज 7.80 लाख करोड़ रुपये के स्थान पर 12 लाख करोड़ रुपये होगा। लेखा महानियंत्रक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष के पहले महीने में अनुमानित राजकोषीय घाटे को एक तिहाई से अधिक का नुकसान हुआ है।

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