Thursday - 24 June 2021 - 11:46 PM

लोहिया चिकित्सा संस्थान की खुली पोल, ऑक्सीजन प्लांट मौजूद लेकिन वार्डों में पड़े हैं ताले

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोरोना बेकाबू है। आलम तो यह है कि लोग ऑक्सीजन और बेड की कमी की वजह से दम तोड़ रहे हैं। हालांकि सूबे के मुखिया योगी आदित्यानाथ रोज अपनी टीम ेके साथ बैठक कर कोरोना को रोकने के लिए रणनीति बनाते हैं।

इतना ही नहीं बीते कुछ दिनों से राजधानी लखनऊ में ऑक्सीजन की कमी की वजह से लोगों की जिंदगी खत्म हो गई है।  हालांकि योगी सरकार ऑक्सीजन को लेकर अब सख्त नजर आ रही है। हाल में ऑक्सीजन को लेकर योगी ने टीम-11 की जगह गठित की टीम-9 के साथ बैठक कर कई अहम निर्देश दिए है।

इसके साथ ही यूपी के कई शहरों में ऑक्सीजन जेनरेटर्स लगाने की तैयारी है लेकिन बदकिस्मती देखिए उत्तर प्रदेश की राजधानी का लोहिया अस्पताल जो गरीब मरीजों के इलाज का सबसे बड़ा ठिकाना था, वह तो छीन लिया लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने।

लेकिन ये उम्मीद नहीं थी कि जब राजधानी के लोग ऑक्सीजन, बेड और वेंटिलेटर के अभाव में हर दिन लोग अपनी जान गवां रहे है और कई लोग ऑक्सीजन बेड और वेंटिलेटर के लिये मारे मारे फिर रहे हैं तब लोहिया संस्थान ने 300 ऑक्सीजन और वेंटिलेटर वाले बेड के उन वार्डों में ताला लगा कर रखेगा जहां ऑक्सीजन प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई होती है।

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इससे यही तो लगता है योगी सरकार को पता ही नहीं उसके घर में ही ऑक्सीजन इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद लोगों की जिंदगी दांव पर लगती नजर आ रही है।

डॉ . राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की कैसे खुली पोल

भारतीय जनता पार्टी से सम्बद्ध भारतीय कामगार कर्मचारी महसंघ ने राष्ट्रीय महासचिव सर्वेश पाठक ने पूरा ब्यौरा देते हुए प्रदेश के मुख्य मंत्री और राज्यपाल को इस सम्बन्ध में पत्र लिख कर शिकायत की है। और बताया है कि कम से कम 800 बेड पर तो आक्सीजन की व्यवस्था की जा सकती है।वैसे 1200बेड खाली हैं जहां कोरोना के मरीजों का इलाज हो सकता है।


आइये जानते हैं कि लोहिया संस्थान मे कैसे और कितने बेड की सुविधा मिल सकती है

सूत्रों के अनुसार डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान गोमती नगर लखनऊ के ओपीडी 1-2-3- के ऊपर सभी फ्लोर पर ऑक्सीजन की सप्लाई है जहां पर ICU वार्ड बने हुए हैं , वेंटीलेटर हैं और यहाँ पर ऑक्सीजन प्लांट भी लगा हुआ है। लेकिन इन वार्डों में ताले लगे हैं।यदि यहां पर मरीजों को भर्ती किया जाए तो लगभग 300 मरीजों को ऑक्सीजन सहित अन्य सुविधा मिल सकती है।

सपा सरकार के कार्यकाल में 4 मंजिल की एक बिल्डिंग आर एम एल संस्थान के परिसर में बनकर तैयार है जो खाली पड़ी हुई है केवल एक फ्लोर पर एक डिपार्टमेंट की ओपीडी चलाई जा रही है इसमें लगभग 300 से 400 बेड कि व्यवस्था हो सकती है केवल अलग से ऑक्सीजन की व्यवस्था करके मरीजों को एडमिट किया जा सकता है।

डॉ राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय की जो बिल्डिंग है जिसमें लगभग चार सौ बेड हैं उसमें केवल 30-35 बेड पर मरीज भर्ती हैं और शेष खाली है जिसमें लगभग 400 मरीजों को भर्ती किया जा सकता है।

राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय का 40 कमरे के प्राइवेट वार्ड ऑक्सीजन युक्त हैं जो खाली पड़े हैं। इस प्रकार से हजारों मरीजों की इलाज की व्यवस्था लोहिया संस्थान में हो सकता है लेकिन राजनीति का अखाड़ा बना लोहिया संस्थान का प्रशासन अपने राजनीतिक आकाओं और चिकित्सा शिक्षा के शासन के आकाओं के दम पर अपनी मनमानी करने में लगा है नहीं तो मुख्य मंत्री से सच न छुपाया जाता और लखनऊ में इतनी मौतें नहीं होतीं।

लोहिया संस्थान ने इस सच को छुपाया क्यों

संस्थान के अधिकारी जानते हैं कि अगर मरीज भर्ती होने लगे तो डॉक्टरों को काम करना पड़ेगा।

हो रही है बड़ी अनियमितता संज्ञान के बाद भी नहीं कोई कारवाई नहीं : DNS; ANS तथा नर्सिंग ग्रेट वन के कर्मचारियों को ड्यूटी लगाने का कार्य तथा वार्ड इंचार्ज बना दिया है जिससे उनको कोविड-19 की ड्यूटी न करनी पड़े उपरोक्त सभी कर्मचारी अधिकारियों के जानने वाले हैं उनका मूल कार्य ना करा कर अलग कार्य कराया जा रहा।

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उपरोक्त सभी कर्मचारियों से वार्डों में कार्य लिया जाना चाहिए और डॉक्टर अपने अपने घरों में बैठे हैं और तनख्वाह ले रहे इससे अच्छा और क्या हो सकता है, आपदा में अवसर मिल गया है सबको।

पहले भी हुई कई शिकायतें,तत्कालीन अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा बने रहे मौन 

सालों एक ही विभाग (चिकित्सा शिक्षा)पर कुंडली मारे बैठे रहने वाले एक अपर मुख्य सचिव ने इस संस्थान को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और उन्हीं की गलत नीतियों के कारण लोहिया अस्पताल इस गति को प्राप्त हो गया।

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इस बात को वहां के कर्मचारी संगठन ने उठाया लेकिन हुआ कुछ नहीं। अगर लोहिया संस्थान में कोविड के मरीजों की भर्ती होती और पूरे बेड पर मरीजों को इलाज मिलता तो सरकार की बदनामी भी नहीं होति और इतनी अफरातफरी न मचती।

अब देखना होगा क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इसको लेकर कोई कदम उठाते हैं या नहीं लेकिन मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत जरूर देखनी चाहिए क्योंकि इस समय आम लोगों को कोरोना के इलाज कराने में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके साथ ही अतिशीघ्र इसे कोविड अस्पताल बनाने के लिए कड़े कदम उठाये और लोहिया प्रशासन की नकेल कसे।

 

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