Thursday - 21 October 2021 - 12:48 AM

कु.मायावती महिला कॉलेज : अध्यापकों का हुआ सम्मान, देखें पूरी लिस्ट

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, दादरी में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित किये गए गुरु वन्दन छात्र अभिनन्दन कार्यक्रम में कु.मायावती राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बादलपुर की प्राचार्या प्रोफ़ेसर (डॉ.) दिव्या नाथ सहित जन्तु विज्ञान प्रभारी डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, भूगोल विभाग प्रभारी लेफ्टीनेंट (डॉ.) मीनाक्षी लोहनी तथा शिक्षक शिक्षा विभाग प्रभारी डॉ. संजीव कुमार को श्रेष्ठ अध्यापक सम्मान से सुशोभित किया गया।

साथ ही साथ महाविद्यालय की एम.एस.सी की छात्रा कु.हिमांशी तथा बी.एड. द्वितीय वर्ष की छात्रा कु.प्रिया दुबे को उनकी शैक्षिक उपलब्धियों के लिए उत्कृष्ट छात्र सम्मान से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर सम्मान समारोह की अध्यक्षता नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन की प्रथम महिला उषा राजपूत द्वारा की गई।

वन्दे मातरम के सामूहिक स्वरों के उपरांत भारत विकास परिषद के अध्यक्ष योगेश गर्ग द्वारा सभी सम्मानित शिक्षकों एवं छात्राओं का अभिनंदन करते हुए भारत विकास परिषद के सेवा,संस्कार,सम्पर्क,सहयोग और समर्पण के सूत्र वाक्य की मूल अवधारणा प्रस्तुत की गई।

उन्होंने बताया कि भारत विकास परिषद भारतीय दर्शन और भारतीय संस्कृति सहित भारतीय मूल्यों एवं संस्कारों के प्रचार,संरक्षण एवं संवर्धन हेतु स्थापित समाजसेवी संस्था है जो राष्ट्र एवम राष्ट्रीयता के उत्थान के लिए दृढ़संकल्पित है।

इस अवसर पर नोएडा कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन के समस्त शिक्षकों,छात्रों एवं भारत विकास परिषद के समस्त प्रतिनिधियों की उपस्थिति एवं सहयोग सराहनीय रहा।

प्रोफ़ेसर (डॉ.) दिव्या नाथ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सनातन परम्परा में सदा ही सद्गुरु की महिमा का आदर्श वर्णन किया गया है।

गीता में भी स्पष्ट कहा गया है कि अपने जीवन को सुंदर,निष्काम और निर्दोष करना ही सबसे बड़ी विद्या है। इस विद्या को सिखाने वाला व्यक्तित्व ही सद्गुरु कहलाता है।

स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा है कि सद्गुरु वही है जिसे गुरु परम्परा से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त हुई हो। नोएडा कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन की निर्देशिका उषा राजपूत ने गुरु-शिष्य सम्बन्धो पर अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि गुरु द्रोणाचार्य नहीं होते तो धनुर्धर अर्जुन इतने महान योद्धा नहीं बनते।

यदि चाणक्य जैसा विद्वान गुरु न होता तो चन्द्रगुप्त जैसा चक्रवर्ती सम्राट नहीं होता और यदि स्वामी रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक कृपा न होती तो स्वामी विवेकानंद विश्वधर्म सम्मेलन में भारतीय धर्म और दर्शन की विजय पताका न लहरा पाते।

अतः स्पष्ट है गुरु है तो राष्ट्र की गरिमा है। नोएडा कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन की प्राचार्या डॉ. प्रतिभा गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

इस अवसर पर उनके द्वारा कु.मायावती राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बादलपुर तथा नोएडा कॉलेज ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन के मध्य शैक्षणिक सहयोग एवं उन्नयन हेतु हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग की भी चर्चा की गई।

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