इस्लामाबाद वार्ता 2.0 पर सस्पेंस: एक तरफ ट्रंप की ‘बमबारी’ वाली धमकी, दूसरी तरफ कूटनीति की मेज; क्या टलेगा महायुद्ध?

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित ‘वार्ता 2.0’ को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “बमबारी” की कड़ी चेतावनी दी है, वहीं दूसरी ओर शांति की धुंधली उम्मीदें भी दिखाई दे रही हैं।
ट्रंप का सख्त रुख: “सीजफायर टूटा तो गिरेंगे बम”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक कोशिशों के बीच एक बार फिर अपने तेवर कड़े कर लिए हैं।
- परमाणु हथियारों पर नो-कॉम्प्रोमाइज: ट्रंप ने ‘PBS News’ से बातचीत में स्पष्ट किया कि अमेरिका की पहली और आखिरी शर्त यही है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों।
- भीषण युद्ध की चेतावनी: ट्रंप ने दो टूक कहा कि यदि मौजूदा सीजफायर समाप्त होता है, तो ईरान पर “बहुत सारे बम गिरना” शुरू हो जाएंगे।
जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी मिशन
तनाव के बावजूद, ट्रंप ने संकेत दिया है कि कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
- प्रतिनिधिमंडल की रवानगी: ट्रंप के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के लिए रवाना हो चुका है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि वेंस अभी व्हाइट हाउस में ही हैं।
- प्रमुख चेहरे: इस टीम में ट्रंप के करीबी सलाहकार जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल हैं, जो इस वार्ता की गंभीरता को दर्शाता है।
- सीधी बातचीत की शर्त: ट्रंप ने ‘New York Post’ से कहा कि यदि इस्लामाबाद वार्ता सफल रहती है, तो वे ईरानी नेतृत्व से सीधी बातचीत के लिए भी तैयार हैं।
ईरान का रुख: “वादों पर भरोसा नहीं, दबाव में नहीं झुकेंगे”
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के प्रति कड़ा अविश्वास जताया है।
- पुनर्निर्माण की इच्छा: पेजेश्कियन ने संकेत दिए हैं कि वे युद्ध को समाप्त कर देश की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण पर ध्यान देना चाहते हैं।
- अविश्वास की दीवार: उन्होंने अमेरिकी रवैये को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि बातचीत तभी सार्थक होगी जब वादों का पालन किया जाए। ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा।
वैश्विक शक्तियों की सक्रियता: शी जिनपिंग का बड़ा हस्तक्षेप
इस संकट के बीच चीन भी फ्रंटफुट पर आ गया है। ‘शिन्हुआ’ न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस (MBS) से फोन पर बात की है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): चीन ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री रास्ते में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने की अपील की है।
- चीन का जोर इस बात पर है कि बल प्रयोग के बजाय कूटनीतिक समाधान ही एकमात्र रास्ता है।


