Monday - 12 April 2021 - 1:23 AM

तो इस प्रस्ताव से अमेरिका रखेगा चीन पर नजर

जुबिली न्यूज़ डेस्क

अमेरिका के सीनेटरों ने अमेरिकी संसद में एक विधेयक पेश किया है। ये विधेयक में देश के नागरिकों और कंपनियों के खिलाफ चीनी सेंसरशिप और धमकी देने वाली उनकी रणनीतियों के असर निपटने के लिए तैयार किया गया है। इस विधेयक में चीन की अन्य देशों पर सेंसरशिप और धमकियों पर भी नजर रखने का प्रस्ताव पास किया गया है।

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से एक चीनी सेंसरशिप निगरानी एवं कार्य समूह स्थापित करने को कहा गया है, जिससे अमेरिकियों और अमेरिकी कंपनियों पर चीनी खतरे के प्रभावों को बेहतर तरीके से समझने और उनसे निपटने की रणनीति के क्रियान्वयन में मदद मिल सके।

अमेरिकी संसद में विदेशी संबंध समिति के सदस्य जेफ मार्कले के अलावा सांसद मार्को रुबियो, एजिलाबेथ वारेन और जॉन कार्निन ने इस विधेयक को पेश किया।

विधेयक में चीनी रणनीति और उसके अमेरिका पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी के लिए एक अनुसंधान संगठन या संघ द्वारा वित्त पोषित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की बात कही गई है। इस मामले में मार्कले ने कहा, यह विधेयक इसलिए जरूरी है ताकि हम अपनी आजादी की रक्षा करने की रणनीति बना सकें।

इससे पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की है कि उनके देश ने पिछले चार दशक में 77 करोड़ से ज्यादा लोगों का आर्थिक स्तर सुधरा है। इससे गरीबी के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह से जीत ली है। उन्होंने इसे एक चमत्कार बताया। जिसे 10 साल पहले ही हासिल कर लिया गया।इस लक्ष्य को 2030 तक हासिल करना था।

चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि, 1.4 अरब आबादी वाले चीन से गरीबी का पूरी तरह उन्मूलन हो गया है। 2012 में सत्ता संभालने के बाद से गांवों में रह रहे अंतिम 9.89 करोड़ से अधिक गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकाल लिया गया है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई रिसर्च में ये बात भी सामने आई है कि चीन ने कई देशों में हथियारों की पहुंच बहुत तेजी से बढ़ाई है। 2010 से 2014 के बीच उसने 40 देशों में हथियार बेचे जबकि 2015 से 2019 के बीच यह बढ़कर 53 हो गई।

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इसके अनुसार वर्तमान में चीन दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है। अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को हथियार बेचना बंद कर देने के बाद चीन ने उसे आपूर्ति शुरू की। चीन के लिए पाक सबसे बड़ा हथियार खरीदार है, जबकि चीन ने म्यांमार, अफ्रीका, मध्य-पूर्वी देशों के हथियार बाजार में भी अपनी बढ़त बन ली है।

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