ग्लोबल एनर्जी वॉर: मिडिल ईस्ट में सुलगती चिंगारी से कच्चे तेल में ‘आग’, $100 के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व (Middle East) में भू-राजनीतिक तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें तेज कर दी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य तनातनी और दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के लगभग बंद होने की खबरों ने कच्चे तेल के बाजार में हड़कंप मचा दिया है।
सोमवार को कारोबारी सत्र के दौरान तेल की कीमतों में आए भूचाल ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिन वैश्विक सप्लाई चेन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
बाजार का हाल: कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
सप्लाई रुकने के डर से निवेशकों ने आक्रामक खरीदारी शुरू कर दी है, जिसका असर बेंचमार्क कीमतों पर स्पष्ट दिख रहा है..
| क्रूड ऑयल टाइप | वर्तमान कीमत (प्रति बैरल) | प्रतिशत वृद्धि |
| WTI (अमेरिकी बेंचमार्क) | $90.17 | 7.5% ↑ |
| Brent (अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क) | $96.27 | 6.5% ↑ |
तनाव की मुख्य वजह: गल्फ ऑफ ओमान में सैन्य टकराव
ताजा संकट तब शुरू हुआ जब ईरान ने अमेरिका पर अप्रैल की शुरुआत से लागू सीजफायर के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया।
- घटना: रविवार को गल्फ ऑफ ओमान में अमेरिकी युद्धपोत USS Spruance ने ईरानी ध्वज वाले कार्गो जहाज ‘Touska’ पर फायरिंग की।
- अमेरिकी पक्ष: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए पुष्टि की कि ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था, जिसके बाद उसके इंजन रूम को निशाना बनाकर उसे रोका गया। फिलहाल अमेरिकी मरीन ने जहाज को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
- ईरानी चेतावनी: ईरान के सैन्य कमांड सेंटर ‘खातम अल-अंबिया’ ने इस कार्रवाई को युद्ध के लिए उकसाने वाला कदम बताया है और जवाबी कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: क्यों डरा हुआ है दुनिया का बाजार?
रणनीतिक रूप से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता है, जहाँ से वैश्विक तेल और LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
विशेषज्ञ की राय: Pepperstone के क्रिस वेस्टन का मानना है कि होर्मुज के रास्ते में आई रुकावट ने ट्रेडर्स की गणना बिगाड़ दी है। बाजार अब इस बात को लेकर अनिश्चित है कि सप्लाई चेन को फिर से बहाल होने में कितना वक्त लगेगा।
भारत और दुनिया पर क्या होगा असर?
यदि यह तनाव कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं, तो इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा:
- पेट्रोल-डीजल की महंगाई: घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- लॉजिस्टिक्स कॉस्ट: माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे।
- मुद्रास्फीति (Inflation): वैश्विक स्तर पर महंगाई दर में एक बार फिर उछाल आने की आशंका है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ईरान और अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं। अगर डिप्लोमैटिक स्तर पर बातचीत विफल रहती है, तो ‘ब्लैक गोल्ड’ यानी कच्चा तेल आने वाले हफ्तों में वैश्विक बाजार को और अधिक झुलसा सकता है।



