Saturday - 3 December 2022 - 5:59 PM

जामा मस्जिद में लड़कियों की एंट्री बैन, वजह कर देगी हैरान

जुबिली न्यूज डेस्क

भारत की राजधानी दिल्ली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. जहां दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में लड़कियों के प्रवेश पर पाबंदी गला दी गई है. मस्जिद प्रबंधन ने तीनों एंट्री गेट पर एक नोटिस बोर्ड लगा दिया है जिसमें लिखा है, ‘जामा मस्जिद में लड़कियों का अकेले दाखिल होना मना है.’मतलब कि लड़की के साथ अगर कोई पुरुष अभिभावक नहीं है, तो उन्हें मस्जिद में प्रवेश नहीं मिलेगा. इसे लेकर विवाद बढ़ता हुआ दिख रहा है.

वहीं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने जामा मस्जिद प्रबंधन के इस फैसले की आलोचना करते हुए मुख्य इमाम को नोटिस जारी करने की बात कही है. उन्होंने ट्वीट किया, ‘जामा मस्जिद में महिलाओं की एंट्री रोकने का फैसला बिलकुल गलत है. जितना हक एक पुरुष को इबादत का है, उतना ही एक महिला को भी. मैं जामा मस्जिद के इमाम को नोटिस जारी कर रही हूं. इस तरह महिलाओं की एंट्री बैन करने का अधिकार किसी को नहीं है.

जानें क्यों लगाया प्रतिबंध

जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने साफ किया है कि नमाज पढ़ने के लिए आने वाली महिलाओं को नहीं रोका जाएगा. उन्होंने कहा, ‘ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि लड़कियां अपने प्रेमियों के साथ मस्जिद में आती हैं. अगर कोई महिला जामा मस्जिद आना चाहती है, तो उसे परिवार या पति के साथ आना होगा. अगर नमाज पढ़ने के खातिर आती है तो उसे नहीं रोका जाएगा.’ जामा मस्जिद के पीआरओ सबीउल्लाह खान ने कहा, ‘महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित नहीं है. जब लड़कियां अकेले आती हैं, तो अनुचित हरकतें करती हैं, वीडियो शूट करती हैं. इसे रोकने के लिए बैन है. परिवारों/विवाहित जोड़ों पर कोई प्रतिबंध नहीं है. धार्मिक स्थलों को अनुपयुक्त बैठक बिंदु बनाना नहीं चाहिए. इसलिए प्रतिबंध है.’ ज्यादातर मुस्लिम धर्मगुरुओं के मुताबिक, इबादत को लेकर इस्लाम महिला-पुरुष में कोई फर्क नहीं करता। महिलाओं को भी उसी तरह इबादत का हक है, जैसे पुरुषों को है. मक्का, मदीना और यरुशलम की अल अक्सा मस्जिद में भी महिलाओं की एंट्री बैन नहीं है. हालांकि, भारत की कई मस्जिदों में महिलाओं की एंट्री बैन है.

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जामिदा बीवी ने रचा इतिहास

दिन में पांच बार नमाज पढ़ना इस्लाम के 5 आधारभूत फर्ज में से एक है. मस्जिद में जो शख्स नमाज के लिए अजान देता है, उसे मुआज्जिन कहते हैं और जो शख्स नमाज पढ़ाता है उसे इमाम कहते हैं. आमतौर पर मुआज्जिन और इमाम पुरुष ही होते हैं. लेकिन 2018 में केरल की एक मस्जिद ने इतिहास रच दिया था. 26 जनवरी 2018 को मलप्पुरम जिले की एक मस्जिद में जामिदा बीवी नाम की महिला ने जुमे की नमाज पढ़ाया. इस तरह वह जुमे की नमाज का नेतृत्व करने वाली भारत की पहली महिला इमाम बन गईं.

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