Friday - 27 November 2020 - 1:26 PM

देश-दुनिया को हर साल सम्मोहित करती है छठ की छटा

प्रमुख संवाददाता

लखनऊ. छठ का आज तीसरा दिन है. दीपावली के छठे दिन यह त्यौहार मनाया जाता है इसी वजह से इसका नाम छठ पड़ा. छठ पहले सिर्फ बिहार में मनाया जाता था. आज भी बिहार में गंगा के चौड़े तट पर छठ पूजा की छटा देखते ही बनती है.

रोज़गार के लिए बिहार के लोग जिन-जिन राज्यों में गए वहां-वहां तय त्यौहार भी चला गया. अब तो छठ उत्तर प्रदेश से दिल्ली और मुम्बई तक पहुँच चुका है. इस त्यौहार की वजहों को जानने के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इसमें शामिल होते गए और धीरे-धीरे यह पूरे देश का त्यौहार बन गया.

लखनऊ में गोमती तट पर करीब डेढ़ दशक पहले छठ पूजा शुरू हुई थी जो अब वृहद रूप ले चुकी है. इस साल हालांकि कोरोना महामारी की वजह से इंतजाम इस तरह से किये गए हैं कि भीड़ ज्यादा न हो.

छठ को लेकर एक कहानी मशहूर है. प्रथम देवासुर संग्राम में जब असुरों के हाथों देवताओं की हार शुरू हो गई तब देव माता अदिति ने तेजस्वी पुत्र प्राप्त करने के लिए सूर्य मंदिर में छठी मैया की आराधना की. इस आराधना से प्रसन्न छठी मैया ने तेजस्वी पुत्र का वरदान दिया. अदिति ने जिस तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया उसे आदित्य के नाम से जाना गया और इसी तेजस्वी पुत्र ने असुरों को युद्ध में परास्त किया. इसी के बाद छठ पूजा की शुरुआत हुई.

छठ में आज भी सूर्य भगवान की ही आराधना होती है. छठ की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. मुख्यत: यह पूजा पुत्र के लिए होती है लेकिन वास्तव में छठ पूजा परिवार के कल्याण के लिए की जाती है.

छठ को लेकर एक और कहानी भी सुनाई जाती है. कहा जाता है कि पांडव जब अपना राजपाट जुए में हार गए थे तब भगवान कृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा था. इसी व्रत के बाद पांडवों ने अपना राजपाट दोबारा से हासिल कर लिया था. कहा जाता है छठ मैया सूर्य भगवान की बहन हैं. यही वजह है कि छठ पूजा में सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है.

छठ यूं तो विशुद्ध धार्मिक पर्व है लेकिन इसका वैज्ञानिक महत्व भी है. छठ पूजा जिन दिनों होती है उन दिनों सूर्य की पराबैगनी किरणों का प्रभाव सबसे ज्यादा ज़मीन पर पड़ता है. सूर्य को अर्ध्य देने और छठ पूजा के दौरान जलने वाली अग्नि से पराबैगनी किरणों का असर कम हो जाता है.

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छठ चार दिनों का पर्व है. पहले दिन सेंधा नमक, घी से बना अरवा चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में दी जाती है. अगले दिन से उपवास शुरू हो जाता है. दिन भर के उपवास के बाद शाम को पूजा के बाद प्रसाद में खीर मिलती है जिसे खरना कहते हैं. तीसरे दिन सूर्य को दूध अर्पित किया जाता है. आख़री दिन उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के साथ ही छठ पर्व सम्पन्न हो जाता है.

बिहार में छठ को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है. बिहार में बड़ी संख्या में मुस्लिम परिवार भी छठ का त्यौहार मनाते हैं. मुसलमानों ने छठ को इसलिए अपना लिया क्योंकि इसमें मूर्ति पूजा नहीं होती.

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