Monday - 27 January 2020 - 3:29 AM

बदल गए मानक, अब 16 नहीं 24 डिग्री तापमान पर चलेगा घर का AC

न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली। बिजली बचत के नियम तय करने वाली एजेंसी ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ने कहा कि कमरे के एयरकंडीशनरों (AC) का डिफॉल्ट (अपने आप में तय) तापमान अब 24 डिग्री सेल्सियस होगा। इसका मतलब है कि कमरे का तापमान 24 डिग्री रखने के हिसाब से ही एसी चलेगा। व्यक्ति जरूरत के हिसाब से इसे ऊपर नीचे कर सकता है।

केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, सरकार ने बीईई के साथ परामर्श कर कमरे के एसी के लिए ऊर्जा बचत के मानक 30 अक्टूबर, 2019 को ही अधिसूचित कर दिए थे। इसके अनुसार विनिर्माताओं को कमरे के एयर कंडीशनर में तापमान की सेटिंग 24 डिग्री सेल्सियस पर रखनी अनिर्वाय होगी।

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नए मानकों के अनुसार भारतीय सीजनल ऊर्जा दक्षता अनुपात (आईएसईईआर) स्प्लिट एयर कंडीशनरों के लिए (3.30 से 5.00) और विंडो एयर कंडीशनर के लिए (2.70 से 3.50) तक होगा।

इस अधिसूचना के द्वारा बीईई स्टार-लेबलिंग कार्यक्रम के दायरे में आने वाले सभी रूम एयर कंडीशनरों के लिए 24 डिग्री सेल्सियस डिफॉल्ट सेटिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। तापमान की डिफॉल्ट 24 डिग्री सेल्सियस की सेटिंग को छोड़कर बाकी कार्य प्रदर्शन मानक एक जनवरी 2021 से लागू है।

अधिसूचना के अनुसार, स्‍टार लेबल वाले सभी ब्रांड और सभी प्रकार के रूम एयर कंडीशनरों अर्थात मल्टी-स्टेज कैपेसिटी एयर कंडीशनर, यूनिट्री एयर कंडीशनर और स्प्लिट एयर कंडीशनरों को 10,465 वॉट (9,000 किलो कैलोरी/घंटा) की कूलिंग क्षमता तक की आपेक्षित ऊर्जा, दक्षताओं के आधार पर एक से पांच स्टार तक रेटिंग दी गई है।

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जिनका भारत में निर्माण किया गया है या व्यावसायिक रूप से खरीदा या बेचा गया है, वे सभी एक जनवरी 2020 से 24 डिग्री सेल्सियस पर कमरे के एयर कंडीशनर में तापमान की डिफ़ॉल्ट सेटिंग सुनिश्चित करेंगे।

इतने अरब बिजली की होगी बचत

बीईई ने 2006 में स्थिर गति रूम एयर कंडीशनरों (आरएसी) के लिए स्टार लेबलिंग कार्यक्रम शुरू किया था। इसे एक जनवरी 2018 से अनिवार्य बनाया गया था। रूम एयर कंडीशनरों के लिए बीईई स्टार लेबलिंग कार्यक्रम में अब 10,465 वॉट (2.97 टीआर) तक की कूलिंग क्षमता वाले फिक्स्ड और इन्वर्टर आरएसी दोनों ही शामिल हैं।

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कार्य प्रदर्शन के स्तर में लगातार वृद्धि से स्प्लिट इकाइयों के लिए न्यूनतम ऊर्जा प्रदर्शन मानकों (एमईपीएस) में लगभग 43% ऊर्जा दक्षता सुधार हुआ है।

ये इकाइयां बाजार में बेची जाने वाली सबसे लोकप्रिय आरएसी हैं। मंत्रलाय के अनुसार रूम एयर कंडीशनरों (आरएसी) के लिए स्टॉर लेबलिंग कार्यक्रम ने अकेले वित्त वर्ष 2017-18 में अनुमानित 4.6 अरब यूनिट ऊर्जा बचत की है और इससे 3.8 करोड़ टन टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिली है।

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50 डिग्री तक जाता है तापमान

भारत में गर्मी का मौसम अप्रैल से शुरू होकर के अक्टूबर तक रहता है। इस दौरान अप्रैल के आखिरी दिनों से लेकर के 30 जून तक भीषण गर्मी पड़ती है, जिसमें तापमान कई इलाकों में 50 डिग्री के आस-पास चला जाता है।

हालांकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जुलाई- सितंबर के बीच मानसून सीजन में उमस भी काफी पड़ती है, जिससे कूलर भी काम नहीं करते हैं। उस वक्त केवल एसी ही उमस से निजात देता है। इसलिए लोग 16 से 18 डिग्री सेल्सियस पर एसी का तापमान रखते हैं।

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