Thursday - 3 December 2020 - 10:57 AM

बिहार चुनाव में NDA के पास कोई मुद्दा नहीं !

जुबिली स्पेशल डेस्क

बिहार के चुनावी दंगल में कौन बाजी मारेगा ये तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन नीतीश कुमार को लालू के लाल तेजस्वी यादव से सीधी चुनौती मिल रही है।

आलम तो यह है कि नीतीश की चुनावी सभा में लालू जिंदाबाद के नारे भी लग रहे हैं। इतना ही नहीं नीतीश की रैली में लालू ही क्या तेजस्वी यादव जिंदाबाद के नारे भी लगते दिख रहे हैं।

इस वजह से नीतीश कुमार को गुस्सा भी आ रहा है लेकिन संकेत साफ है कि इस बार नीतीश की राह आसान होने नहीं जा रही है। युवा तेजस्वी को जनता भी जोरदार समर्थन भी मिल रहा है।

तेजस्वी यादव अपने चुनावी अभियान में केवल नीतीश कुमार को फोकस कर चुनाव लड़ रहे हैं। इसके साथ ही नीतीश के 15 साल के कामकाज को लेकर तेजस्वी उन पर निशाना साध रहे हैं।

दूसरी ओर एनडीए की बात की जाये तो उनकेपास बिहार में बताने को कुछ नजर नहीं आ रहा है। भले ही नीतीश के चेहरे पर चुनाव लड़ा जा रहा है लेकिन अब बीजेपी को शायद इस बात का एहसास हो गया है कि उसे बिहार में नीतीश की नहीं बल्कि पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लडऩे में भलाई समझी।

इस वजह से पीएम मोदी की योजनाओं को बिहार की जनता के सामने पेश किया जा रहा है। दूसरी ओर बीजेपी के कई नेता मुद्दों को भटकाने में लगे हुए है।

जहां तेजस्वी एकदम फोकस कर टारगेट कर रहे हैं तो दूसरी ओर एनडीए हिंदू-मुसलमान-पाकिस्तान जैसे पुराने मुद्दों को उठाकर चुनावी दंगल में मैदान मारना चाहती है। ऐसे में बड़ा सवाल है क्या उनके पास कोई मुद्दा नहीं है जिस पर वो चुनावी दंगल में ताल ठोंक सके। डबल इंजन वाली सरकार को लेकर तेजस्वी यादव लगातार हमलावर है।

बिहार की राजनीतिक को करीब से देखने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुमार भावेश ने जुबिली पोस्ट को बताया कि बिहार में इस बार नीतीश को तेजस्वी से कड़ी टक्कर मिल रही है।

उन्होंने कहा कि नीतीश के पास बताने को कुछ नहीं है। इस वजह से नीतीश कुमार अपनी सरकार की नाकामी के बजाये लालू के 15 साल के राज को जंगलराज बताकर सत्ता हासिल करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के आखिरी पांच सालों में कई घोटाले हुए और उनपर लगा सुशासन बाबू का टैग अब खराब हो चुका है। शेल्टर होम जैसी शर्मनाक घटना ने नीतीश कुमार की छवि को खराब कर दिया है। इस वजह से बीजेपी को इस बात एहसास है कि दोबारा सत्ता नीतीश के सहारे हासिल नहीं की जा सकती है।

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इस वजह से लालू राज का मुद्दा उठाया जा रहा है। दूसरी ओर अगर बात तेजस्वी यादव की जाये तो शुरुआत में ऐसा लग नहीं रहा था कि तेजस्वी इस अंदाज में नजर आयेगे लेकिन उन्होंने अपने युवा जोश से नीतीश को पटखनी देने का हुनर रखते नजर आ रहे हैं।

कुमार भावेश ने कहा कि जनता बदलाव चाहती है। इस वजह से तेजस्वी की रैली में भारी संख्या में लोग आ रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल है क्या ये भीड़ वोट में बदलेगी।

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