Saturday - 28 January 2023 - 5:53 AM

तो क्या ज्यादा सीटें होने पर बीजेपी फंसा सकती है पेंच

जुबिली न्यूज़ डेस्क

बिहार चुनाव का परिणाम आ चुके हैं। एनडीए और महागठबंधन के बीच हुई करारी टक्कर के बाद एनडीए को बिहार की जनता ने बहुमत दिया है। बहुमत का आंकड़ा पार करने के बाद अब बिहार में सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है।

इस पर दल के बड़े नेताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई है। वैसे तो नीतीश कुमार दिवाली के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन किसको मंत्री बनाया जायेगा इसको लेकर बातचीत शुरू हो चुकी है।

बताया जा रहा है कि सात विधायकों में से दो को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है। हालांकि ऐसा अभी तय नहीं है क्योंकि जब एनडीए का शीर्ष दल बैठकर इस पर चर्चा करेगा तो इस फ़ॉर्मूले पर बदलाव भी हो सकता है।

नियम के अनुसार, बिहार में सीएम सहित 36 और मंत्री हो सकते हैं।2015 में एनडीए की सरकार में कुल 31 मंत्री थे। इसमें सीएम को मिलाकर जदयू कोटे से 17 मंत्री थे, जबकि बीजेपी कोटे से 13 मंत्री बनाये गये थे। यही नहीं विधान सभा अध्यक्ष भी जेडीयू कोटे से ही बनाए गये थे।

हालांकि, पिछली सरकार में जदयू बड़े भाई की भूमिका में थी, क्योंकि पिछले चुनाव में बीजेपी के 53 और जेडीयू 71 विधायक थे। इसी आधार पर कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या फॉर्मूला तय हुआ था। वहीं इस बार बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में है और बीजेपी के विधायकों की संख्या जदयू से कहीं ज्यादा है। ऐसे में मंत्रिपद को लेकर भी पेच फंस सकता है।

इस बार एनडीए के 125 विधायक जीत कर आए हैं। इनमें बीजेपी के 74 और जदयू के 43 विधायक हैं। वहीं हम और वीआईपी के चार-चार विधायक हैं। मौजूदा फॉर्मूला के हिसाब से अगर हम और वीआईपी मंत्रिमंडल में शामिल हुए तो दोनों दलों से एक-एक मंत्री हो सकते हैं। जबकि जदयू से 13 तो भाजपा से 21 मंत्री बन सकते हैं।

दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों से ऐसी खबरें आने लगी हैं कि सरकार में जदयू और भाजपा कोटे से बराबर-बराबर मंत्री बनाये जा सकते हैं। जबकि आगे कभी मंत्रिमंडल विस्तार होने पर संख्या बल के हिसाब से घटकदलों के सदस्यों को मंत्री बनाया जा सकता है।

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जबकि कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी के ऊपर अधिक मंत्री पद हासिल करने का भी दबाव हो सकता है। ये दबाव उनके विधायकों द्वारा ही बनाया जा सकता है।

इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष किस दल का होगा, इसका फैसला एनडीए के नेता आपसी बैठक के बाद तय करेंगे। इस मामले में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पत्रकारों से बताया कि राजनीति में कोई बड़ा भाई और छोटा भाई नहीं होता है। किस दल के मंत्री अधिक रहेंगे यह कोई मुद्दा नहीं है।

क्या बोले मांझी

पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि एनडीए की अगली सरकार में वे स्वयं मंत्री नहीं बनेंगे। वे मुख्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में वे फिर मंत्री बनना नहीं चाहेंगे। वहीं पार्टी से कोई मंत्री बनेगा या नही इसका फैसला सीएम करेंगे। अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। मांझी ने गुरुवार को अपने विधायक दल की बैठक बुलायी है। गौरतलब हो कि हम के चार उम्मीदवार चुनाव जीत कर आये हैं।

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