Friday - 19 August 2022 - 1:54 PM

आसिफ जमां बोले-प्रियंका नहीं डॉ. शीमा रिजवी थीं ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ की असली मिसाल

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादेमी के तत्वाधान में आयोजित “एक शाम डॉ. शीमा रिज़वी के नाम” कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के निवर्तमान सदस्य–अल्पसंख्यक मोर्चा आसिफ़ ज़मां रिज़वी ने कहा कि डॉ. शीमा रिज़वी ने अपने जीवन में ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ कि अस्ल मिसाल ज़माने के सामने पेश की है जो आज के युवा वर्ग और ख़ास तौर पर समाज की लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

आसिफ़ ज़मां रिज़वी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रहीं डॉ. शीमा रिज़वी ने अपनी शैक्षिक योग्यताओं और अपने गुणों के दम पर आज हमारे सामने एक मिसाल पेश की है जो विशेषकर मुस्लिम लड़कियों के लिए प्रेरणादायक है ।

आसिफ़ ज़मां रिज़वी ने कहा कि चूँकि उन्होंने डॉ शीमा की ज़िन्दगी को बचपन से बेहद क़रीब से देखा है इसलिए वो ये बात आज पूरी इमानदारी के साथ कह सकते हैं ।

उन्होंने कहा कि डॉ शीमा रिज़वी ने वो-वो काम अपनी कम ज़िन्दगी में कर दिखाए जो एक आम लड़की करने का साहस भी शायद न कर सके । मुस्लिम वर्ग की लड़की होते हुए भी डॉ शीमा रिज़वी ने अपने पिता स्व. एज़ाज़ रिज़वी के सहयोग और सहमती से उच्च शिक्षा सदैव प्रथम श्रेणी में प्राप्त की।

उर्दू में परास्नातक डिग्री हासिल करने के उपरान्त अंग्रेजी माध्यम की ना होते हुए भी डॉ शीमा रिज़वी ने दूसरी परास्नातक डिग्री इंग्लिश सब्जेक्ट में हासिल की । अपने शिक्षा को उन्होंने यहीं विराम नही दिया –वरन इससे आगे उर्दू में Ph.D और फिर उर्दू में D.Litt की उपाधि भी हासिल की। इसके अतिरिक्त डॉ शीमा ने लाइब्रेरी साइंस का कोर्स भी किया और साथ में आलिम (अरबी भाषा), साहित्य रत्न (हिंदी), फ्रेंच भाषा का कोर्स, दबीर-ए-कामिल (पर्शियन) और दबीर-ए-माहिर (पर्शियन) आदि भी किया।

इसके अतिरिक्त डॉ शीमा रिज़वी 17 पुस्तकों की लेखिका भी थीं । आसिफ़ ज़मां रिज़वी ने कहा कि डॉ. शीमा रिज़वी ने अपने जीवन में ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ कि अस्ल मिसाल इसलिए बनीं क्योंकि उन्होंने अपनी ज़िन्दगी के हर क़दम और हर मोड़ पर संघर्ष किया और ज़माने से लड़ीं – अपनी शिक्षा के दौरान, लखनऊ विश्विद्यालय के उर्दू विभाग में अपनी नौकरी के दौरान एक शिक्षिका के तौर पर, अपने फन और हुनर के दम पर दूरदर्शन और आकाशवाणी में एक उदघोशिका और न्यूज़ रीडर के रूप में, डॉ शीमा लड़ीं हर उस विपरीत परस्थिति से जो उनको अपने जीवन में आगे जाने से रोकती थी ।

वो लड़ीं इस समाज की पुरुष प्रधान सोच और मानसिकता से । यहाँ तक कि हज और उमरा के दौरान वो लड़ीं उन मर्दाना ताक़त के समूह से जो उनको काबे शरीफ के निकट जा कर उसका बोसा लेने में बाधा बनते थे । आसिफ़ ज़मां रिज़वी ने कहा कि डॉ. शीमा रिज़वी ने अपने अटल इरादों की बदौलत समाज की कुरीतियों से लड़ अपनी एक अलग पहचान बनायीं है।

पूर्व राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रहीं डॉ. शीमा रिज़वी की जयंती के उपलक्ष में उनकी याद में उत्तर प्रदेश उर्दू अकादेमी के सभागार में अखिल भारतीय मुशायरा भी आयोजित हुआ जिसमे देश के प्रख्यात शायरों ने अपने शेर और कलाम पढ़े जिसमें जौहर कानपुरी, शबीना अदीब, मंज़र भोपाली, मखमूर काकोरवी और श्यामा सिंह सबा आदि शामिल थे । कार्यक्रम की कन्वीनर उत्तर प्रदेश उर्दू अकादेमी की सदस्य डॉ रिजवाना थीं जो डॉ शीमा रिज़वी की लखनऊ विश्विद्यालय में शागिर्द रह शुकी हैं। अपने धन्यवाद ज्ञापन में डॉ रिजवाना ने कहा कि डॉ शीमा रिज़वी एक रोशनी का मुसाफिर थीं जिसने अपनी चमक से बहुत से युवाओं का भविष्य रौशन किया है ।

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