‘पत्रकार’ बने डिप्टी CM ब्रजेश पाठक पर सियासी संग्राम, अखिलेश यादव का तंज तेज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak का नया अंदाज चर्चा का केंद्र बन गया है. पिछले कुछ दिनों से वह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग नेताओं के साथ बातचीत के वीडियो साझा कर रहे हैं, जिसमें कभी पॉडकास्ट स्टाइल इंटरव्यू तो कभी ‘वॉक एंड टॉक’ फॉर्मेट देखने को मिल रहा है. इसी को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है और समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने इस पर तंज कसा है.
‘PDA राजनीति’ पर सीधा हमला
ब्रजेश पाठक लगातार समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव को निशाने पर ले रहे हैं. हाल ही में उन्होंने अपने सरकारी आवास पर पिछड़ा कल्याण मंत्री Narendra Kashyap के साथ पॉडकास्ट शैली में बातचीत की. इस दौरान नरेंद्र कश्यप ने आरोप लगाया कि सपा का PDA केवल एक जाति और परिवार तक सीमित रह गया है और यह सिर्फ वोट बैंक की राजनीति बनकर रह गया है.
अखिलेश यादव का पलटवार
इस इंटरव्यू पर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में नाकाम रहे, अब पत्रकार बनने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता बिजली, गर्मी और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है, जबकि मंत्री “इंटरव्यू-इंटरव्यू खेल” रहे हैं.
ब्रजेश पाठक का जवाब
अखिलेश यादव के बयान के बाद ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए कहा कि पत्रकार होना गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि संवाद और साक्षात्कार लोकतंत्र की आत्मा हैं और भारतीय परंपरा में विचार-विमर्श हमेशा से अहम रहा है. पाठक ने यह भी कहा कि पत्रकारों को ‘खलिहर’ कहना मेहनतकश समाज का अपमान है.
उन्होंने अपने पोस्ट में Deendayal Upadhyaya, Ram Manohar Lohia और Jayaprakash Narayan का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े जननेता भी संवाद और पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं.
पहले भी दिख चुका है ‘वॉक एंड टॉक’ अंदाज
इससे पहले बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर ब्रजेश पाठक ने उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya के साथ कुशीनगर में टहलते हुए बातचीत का वीडियो साझा किया था, जिसे सोशल मीडिया पर ‘वॉक एंड टॉक’ नाम दिया गया. इस पर भी अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा था कि दो स्टूल मिलाकर कुर्सी नहीं बनती.
इसके अलावा पाठक केंद्रीय मंत्री S. P. Singh Baghel के साथ भी इसी तरह की बातचीत कर चुके हैं.
OBC राजनीति और रणनीति की चर्चा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा ट्रेंड ओबीसी और पिछड़े वर्गों में भाजपा की पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है. वहीं सपा इसे सरकार की असफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश बता रही है.
अब देखना होगा कि यूपी की राजनीति में यह “पॉडकास्ट बनाम PDA” की सियासी लड़ाई आगे क्या नया मोड़ लेती है.



