Google-Meta केस में AI का कमाल, वकील ने खोला तैयारी का पूरा राज

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ टेक्नोलॉजी और बिजनेस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कानूनी लड़ाई में भी इसकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इसका एक बड़ा उदाहरण उस मुकदमे में सामने आया, जिसमें Google और Meta Platforms को कोर्ट के फैसले के बाद जुर्माना भरने का आदेश दिया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों कंपनियों पर करीब 6 मिलियन डॉलर (लगभग 57 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म्स से जुड़े संभावित खतरों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने यूजर्स को पर्याप्त चेतावनी नहीं दी।
AI की मदद से तैयार किया गया मुकदमा
इस केस में 20 वर्षीय युवती की ओर से पैरवी करने वाले वकील Mark Lanier ने दावा किया कि उन्होंने मुकदमे की तैयारी के लिए AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया।
लेनियर के मुताबिक, AI ने केस की रिसर्च, दस्तावेजों के विश्लेषण और कोर्ट की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इसे अपनी कानूनी टीम के लिए “गेम चेंजर” बताया।
BoodleBox AI टूल का किया इस्तेमाल
लेनियर ने बताया कि उन्होंने BoodleBox नाम के AI टूल का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर एक साथ कई बड़े AI मॉडल्स के साथ काम किया जा सकता है, जिससे रिसर्च प्रक्रिया तेज हुई।
उन्होंने दावा किया कि यह टूल उनकी टीम में लगभग 10 प्रशिक्षित कर्मचारियों के बराबर काम कर रहा था और यह लगातार दस्तावेजों का विश्लेषण करने में सक्षम था।
मार्क जुकरबर्ग की क्रॉस-एग्जामिनेशन में भी AI की मदद
लेनियर ने बताया कि उन्होंने Mark Zuckerberg से जुड़े क्रॉस-एग्जामिनेशन की तैयारी में भी AI टूल्स की मदद ली।
उनके मुताबिक, रोजाना कोर्ट की सुनवाई की ट्रांसक्रिप्ट AI में डालकर उसका विश्लेषण किया जाता था। AI संभावित दलीलों, जरूरी दस्तावेजों और कोर्ट के सामने किसी मुद्दे को रखने के तरीकों पर सुझाव देता था।
AI से गलतियां भी हुईं
हालांकि लेनियर ने यह भी माना कि AI पूरी तरह भरोसेमंद नहीं है। उन्होंने कहा कि कई बार AI ने ऐसे रिकॉर्ड या जानकारी सामने रखी जो पूरी तरह सही नहीं थीं।
इसलिए कानूनी मामलों में AI की मदद लेने के बावजूद मानव विशेषज्ञों द्वारा तथ्यों की जांच जरूरी है।
अदालतों में AI के इस्तेमाल पर बहस जारी
कानूनी प्रक्रिया में AI के इस्तेमाल को लेकर दुनियाभर में बहस चल रही है। कुछ विशेषज्ञ इसे समय बचाने वाला प्रभावी उपकरण मानते हैं, जबकि कई न्यायाधीश और कानूनी विशेषज्ञ इसके गलत इस्तेमाल और गलत जानकारी देने की संभावना को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
AI के बढ़ते उपयोग के साथ आने वाले समय में अदालतों और कानूनी पेशे में इसकी भूमिका और बड़ी हो सकती है।



