International Yoga Day 2026: कोलकाता पहुंचे पीएम मोदी, बोले- ‘योग केवल आसन नहीं, मानवीय एकता का आधार है’

12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: विवेकानंद और अरविंद की धरती से गूंजा वैश्विक कल्याण का मंत्र
जुबिली स्पेशल डेस्क
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर इस बार देश और दुनिया की नजरें कोलकाता पर टिकी रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर हजारों लोगों के साथ सामूहिक योगाभ्यास कर इस दिन को बेहद खास बना दिया। इस बार का योग दिवस सिर्फ शारीरिक कसरत तक सीमित नहीं दिखा, बल्कि यह बंगाल की महान आध्यात्मिक विरासत और भविष्य की वैश्विक स्वास्थ्य जरूरतों का एक अनूठा संगम बनकर उभरा।
बंगाल की पवित्र भूमि से योग का नया शंखनाद
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि योग दिवस के मौके पर बंगाल में होना अपने आप में एक अलग अनुभूति है। उन्होंने इसे एक नए नजरिए से पेश करते हुए याद दिलाया कि यह वही भूमि है जिसने विश्व को योग की सही समझ दी:
- भगवान रामकृष्ण परमहंस जैसे सिद्ध संतों ने इस पवित्र धरा पर अवतार लिया।
- स्वामी विवेकानंद ने इसी धरती से निकलकर पूरे विश्व को योग की शक्ति से परिचित कराया।
- महर्षि अरविंद जैसे महान योगी ने जन्म लिया, जिनका मानना था कि हमारा पूरा जीवन ही योग है, चाहे हमें इसका बोध हो या न हो।
‘हेल्दी एजिंग’: 2026 की थीम जो जीवन को देगी नया विस्तार
इस साल योग दिवस का 12वां संस्करण एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण संदेश के साथ मनाया जा रहा है—‘हेल्दी एजिंग के लिए योग’ (Yoga for Healthy Aging)।
बदलता नजरिया: यह थीम केवल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को संभालने की बात नहीं करती, बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर सक्रिय, ऊर्जावान और मानसिक रूप से समृद्ध जीवनशैली को बढ़ावा देती है। पीएम मोदी ने साफ किया कि योग किसी एक आयु वर्ग के दायरे में सिमटा हुआ नहीं है, बल्कि यह मानवीय एकता और दुनिया के बेहतर भविष्य की बुनियादी आवश्यकता है।
पीएम मोदी के संबोधन की मुख्य बातें
- वैश्विक उत्सव: 21 जून साल का सबसे लंबा दिन होता है, और अब यह दुनिया का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव बन चुका है जो सबको आपस में जोड़ता है।
- चैतन्य भारत की तस्वीर: हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर हिंद महासागर की लहरों तक, और पश्चिम में सौराष्ट्र से लेकर पूर्व में बंगाल तक, पूरा देश आज योग की सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर है।
- एकता का आधार: योग अब केवल हमारी निजी जीवन शैली का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता और चेतना को एक सूत्र में पिरोने का माध्यम है।



