TMC Crisis: सुष्मिता देव ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा, ममता बनर्जी की पार्टी में बढ़ी अंदरूनी कलह

कोलकाता/नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया है। सुष्मिता देव का यह कदम ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत की चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं।
कांग्रेस से TMC तक का सफर
सुष्मिता देव ने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। कांग्रेस में वह महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी प्रवक्ता जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुकी थीं। TMC में शामिल होने के बाद उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और बाद में राज्यसभा भेजा गया।
TMC में बढ़ रही बगावत की चर्चा
सुष्मिता देव से पहले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति को लेकर चर्चाओं को हवा दी है। राजनीतिक गलियारों में इसे TMC के अंदर उभर रहे असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
बागी गुट के दावों से बढ़ी हलचल
पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष ने दावा किया है कि TMC के करीब 20 सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की इच्छा जता चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र भी सौंपा गया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
इसी बीच TMC सांसद पार्थ भौमिक ने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी को पत्र लिखकर दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय खाली करने की मांग की है। पार्थ भौमिक को भी बागी गुट के नेताओं में गिना जा रहा है।
कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर साधा निशाना
पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने बागी गुट के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वास्तव में 20 सांसद उनके साथ हैं तो उनके नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जो नेता पार्टी से असहमत हैं, उन्हें सार्वजनिक विरोध के बजाय अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए।
कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि कथित समर्थन पत्र अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे बागी गुट के दावों पर सवाल उठते हैं।
लोकसभा स्पीकर के फैसले पर टिकी निगाहें
TMC के भीतर जारी इस राजनीतिक खींचतान के बीच अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि बागी गुट संसद में अलग समूह बनाने के लिए आवश्यक संख्या जुटाने में सफल नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।



