टीएमसी में बड़ी टूट की आहट: 20 सांसदों ने अलग संसदीय गुट बनाने का दावा, ममता की मुश्किलें बढ़ीं

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को झटका लगने के बाद अब पार्टी के भीतर राजनीतिक संकट और गहराता दिखाई दे रहा है। विधायक दल में बगावत के बाद अब टीएमसी की संसदीय पार्टी में भी टूट लगभग तय मानी जा रही है। सोमवार को पार्टी के बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री Bhupender Yadav के आवास पर बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari भी मौजूद रहे।
बैठक के बाद टीएमसी की वरिष्ठ सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को एक पत्र सौंपकर लोकसभा में अलग संसदीय गुट बनाने का दावा पेश किया। बताया जा रहा है कि इस पत्र पर टीएमसी के 20 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
ममता बैठक में थीं, सांसद अलग रास्ते पर
दिलचस्प बात यह रही कि जब Mamata Banerjee दिल्ली में विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल थीं, उसी दौरान बागी सांसदों ने अलग राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया। सूत्रों के अनुसार यह पत्र सोमवार दोपहर 12:53 बजे लोकसभा सचिवालय में जमा कराया गया।
लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। काकोली घोष दस्तीदार का दावा है कि इनमें से 20 सांसद उनके साथ हैं। हालांकि अभी तक सभी सांसदों के नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। जिन नामों की चर्चा हो रही है उनमें प्रसून बनर्जी, पार्थ भौमिक, शर्मिला सरकार, असित माल, जगदीश बसुनिया, कालीपद सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी और देव जैसे सांसद शामिल बताए जा रहे हैं।
बीजेपी में नहीं, लेकिन एनडीए के साथ रहने का दावा
बागी सांसदों द्वारा दिए गए पत्र में कहा गया है कि वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बनने के इच्छुक हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस दावे को मान्यता देते हैं, तो टीएमसी संसदीय दल आधिकारिक रूप से विभाजित हो सकता है।
हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उस समय दिल्ली में मौजूद नहीं थे। इसलिए पत्र उनके कार्यालय में जमा कराया गया है। अब इस मामले पर अंतिम निर्णय स्पीकर द्वारा ही लिया जाएगा।
मुख्य सचेतक पद को लेकर भी विवाद
काकोली घोष दस्तीदार ने यह पत्र टीएमसी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के रूप में जमा किया। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले ममता बनर्जी ने उन्हें इस पद से हटाकर Kalyan Banerjee को यह जिम्मेदारी सौंपी थी।
काकोली का तर्क है कि लोकसभा का सत्र नहीं होने के कारण उनके पद से हटाए जाने की प्रक्रिया अभी तक संसदीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुई है। इसी आधार पर उन्होंने स्वयं को अभी भी मुख्य सचेतक बताते हुए पत्र सौंपा।
पहले विधायक दल में भी हो चुकी है बगावत
इससे पहले टीएमसी को विधानसभा के भीतर भी बड़ा झटका लग चुका है। Ritabrata Banerjee के नेतृत्व में 58 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग गुट बनाने का दावा किया था। विधानसभा अध्यक्ष ने उस दावे को मान्यता भी दे दी थी।
अब यदि सांसदों का यह दावा भी स्वीकार हो जाता है, तो टीएमसी को विधानसभा और संसद दोनों स्तरों पर गंभीर राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी की एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि दूसरी ओर विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं।



